लखनऊ में हुई कैबिनेट की बैठक में बहराइच में लंबित मेडिकल कॉलेज के लिए शहर में ही जमीन उपलब्ध कराने पर मुहर लगा दी गई है। अब कृषि विभाग की जमीन में ही मेडिकल कॉलेज बनेगा। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। फाइल केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद बजट का आवंटन होगा। कवायद में तीन माह लगने की उम्मीद है।
जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को डेढ़ साल पहले मंजूरी मिली थी। लेकिन जमीन उपलब्ध न हेने से मामला अधर में था। पहले कृषि विभाग ने एनओसी नहीं दी। उसके बाद मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन रिसिया विकास खंड के बंगलाचक में चिह्नित की गई, लेकिन शहर से दूरी अधिक थी। इस कारण प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। इस पर परिवहन राज्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री तक से पैरवी की गई।
नतीजन बुधवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट की बैठक में बहराइच शहर से सटे कृषि अनुसंधान केंद्र के फार्म में आठ एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए मुहैया कराने पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री यासर शाह ने ‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि कृषि विभाग के एनओसी की समस्या सुलझा ली गई है।
डीएम आवास के पीछे स्थित कृषि फार्म में आठ एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए दी जाएगी। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। फाइल 10 दिन में केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी। वहां से बजट का आवंटन होगा। परिवहन राज्यमंत्री यासर ने कहा कि उम्मीद है तीन माह में मेडिकल कॉलेज स्थापना के लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
त्र15 लाख से संवरेगा आजाद इंटर कॉलेज
शहर में स्थित आजाद इंटर कॉलेज को संवारने के लिए भी कैबिनेट की बैठक में 15 लाख की ग्रांट मंजूर हुई है। परिवहन राज्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही यह बजट विद्यालय को मुहैया कराया जाएगा। ताकि बहराइच शहर के अति प्राचीन विद्यालय को संवार कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाया जा सके।
जरवल-गोंडा मार्ग होगा फोरलेन
कैबिनेट की बैठक में जरवल-गोंडा टू लेन राजमार्ग को फोरलेन में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। इसका फायदा भी बहराइचवासियों को मिलेगा।
अब लखनऊ का नहीं लगाना होगा चक्कर
बहराइच। बहराइच शहर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी मिलने के बाद स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर होने की उम्मीद है। परिवहन राज्य मंत्री यासर शाह ने बताया कि बहराइच के साथ बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा और नेपालगंज के रोगियों को भी बहराइच में स्थापित होने वाले मेडिकल कॉलेज से सहूलियत मिलेगी। अब गंभीर रोगों के इलाज के लिए जिले की 36 लाख की आबादी को लखनऊ मेडिकल कालेज और ट्रॉमा सेंटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। समय से इलाज मुहैया होगा वहीं पैसे की भी बचत होगी। मेडिकल कॉलेज में हर रोग के इलाज के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात होंगे।