जिले की मटेरा विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से इस पर लगातार सपा का कब्जा बना हुआ है। हालांकि, वर्ष 2012 के पहले चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच कांटे का संघर्ष हुआ था और 2017 में सपा व भाजपा के बीच हुए कांटे के संघर्ष के बाद सपा ने कब्जा बनाए रखा। भाजपा 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट को सपा से छीनने की कवायद में जुटी है। वहीं, सपा के सामने सीट को बचाए रखने की चुनौती रहेगी। देखना यह है कि इस बार सीट पर किसका कब्जा होगा। यह आने वाले 10 मार्च के नतीजे ही बतायेंगे।
जनपद की मटेरा विधानसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। अस्तित्व में आने के बाद पहला चुनाव वर्ष 2012 में हुआ था। चुनाव में सपा से यासर शाह, कांग्रेस से अली अकबर, भाजपा से पद्मसेन चौधरी व बसपा से इजहार अहमद चुनाव मैदान में थे। सपा ने वर्ष 2012 में 41944 वोट पाकर विजय हासिल की थी। कांग्रेस से अली अकबर इस सीट पर 39143 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
भाजपा के पद्मसेन चौधरी 29137 मत पाकर तीसरे व बसपा के इजहार अहमद 27788 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2012 में यहां दो लाख 66 हजार 769 मतदाता थे। इसके बाद वर्ष 2017 में हुए दूसरे चुनाव में भी सपा के यासर शाह ने कब्जा बनाए रखते हुए 79188 मत पाकर विजय हासिल की थी। दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के अरुणवीर सिंह को 77593 मत प्राप्त हुए थे।
बसपा के सुलतान अहमद खान 33482 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट पर हुए दो चुनावों में लगातार सपा के यासर शाह ने कब्जा बरकरार रखा था। इस बार भी यासर शाह की पत्नी मारिया शाह ने मतदाताओं से मिलना प्रारंभ कर दिया है। ऐसे में 2022 के विधानसभा चुनाव में यासर की पत्नी के चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अब देखना यह है कि इस बार सीट पर किसका कब्जा होगा।