तराई में शुक्रवार देर रात आंधी के साथ तेज बारिश हुई। आंधी के चलते ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह पेड़ गिर गए। कई ग्रामीणों के छप्पर भी उड़ गए। इनकी चपेट में आकर दो महिलाओं समेत छह लोग घायल हो गए। उधर, नवाबगंज और नानपारा में मार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन प्रभावित रहा। विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने व शॉर्ट सर्किट के कारण बिजली सप्लाई पूरे जिले में 13 घंटे ठप रही। इसके चलते लोग गर्मी में पेयजल के लिए तरस गए।
तराई में मौसम रह-रह कर बिगड़ रहा है। शुक्रवार की रात करीब 11 बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। लेकिन थोड़ी ही देर में हवाओं ने आंधी का रुख अख्तियार कर लिया। लगभग आधे घंटे तक धूलभरी आंधी का लोगों को सामना करना पड़ा। इसके बाद तेज बारिश शुरू हो गई।
उधर, आंधी के चलते शहर के कटी चौराहा पर गूलर का पेड़ बीच सड़क पर गिर गया। इसकी चपेट में आकर विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। सुबह तक मार्ग पर आवागमन ठप रहा। उधर, नानपारा-नवाबगंज मार्ग पर 13 स्थानों पर पेड़ गिर गए। फखरपुर, महसी, शिवपुर, मिहींपुरवा, पयागपुर और हुजूरपुर क्षेत्रों में भी 80 से अधिक पेड़ जड़ से ढह गए।
आंधी के दौरान बेलहा-बेहरौली तटबंध पर जगदीश, संगमलाल, जियावन, बड़कऊ और रामरती के छप्पर उड़ गए। छप्पर की चपेट में आकर इन परिवारों की दो महिलाओं समेत छह लोग घायल हो गए। उधर, ऐरिया के निकट दिलदार और असगर का मुर्गी फार्म पूरी तरह तहस-नहस हो गया।
अन्य स्थानों पर भी लोगों के टिनशेड उड़ गए। आंधी-पानी के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि गर्मी और उमस के चलते हवा के कम दबाव का क्षेत्र बना। उस कारण आंधी के साथ वर्षा हुई। लगभग आठ मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में मौसम साफ रहेगा। गर्मी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
आंधी के चलते जगह-जगह पेड़ गिरने के कारण चपेट में आकर विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इस कारण पूरी रात बिजली गुल रही। सुबह होने पर विद्युत कर्मियों ने फाल्ट खोजना शुरू किया। दोपहर बाद 12 बजे के आसपास शहर की विद्युत सप्लाई शुरू हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बिजली व्यवस्था सुचारु तरीके से पटरी पर नहीं आ सकी है।