मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के जंगलों से एक दशक पहले पूरे देश को महिलाओं की गरिमा और सम्मान का नया पाठ पढ़ाने वाली भवानीपुर वनग्राम निवासी मनोरानी देवी (51) का मंगलवार को हृदय गति रुकने से निधन हो गया।
मनोरानी देवी कोई जनप्रतिनिधि, अधिकारी या समाजसेवी संस्था की पदाधिकारी नहीं थीं। वह एक साधारण वनवासी महिला थीं, जिन्होंने वर्ष 2013 में ऐसा निर्णय लिया, जिसने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उस समय भवानीपुर गांव में सामुदायिक शौचालय निर्माण की योजना आई थी, लेकिन गांव में कोई भी व्यक्ति इसके लिए अपनी जमीन देने को तैयार नहीं था। ग्रामीण चाहते थे कि शौचालय गांव से दूर जंगल में बनाया जाए।
बैठक के दौरान जब हर ओर खामोशी थी, तब मनोरानी देवी उठीं और कहा- शौचालय गंदगी का नहीं, हमारी बहू-बेटियों की इज्जत और सुरक्षा का सवाल है। अगर कोई जमीन नहीं देगा तो मैं अपनी जमीन देती हूं।