बहराइच। पत्नी का गौना कराने के अगले दिन ही युवक की हत्या में मामले में नानपारा निवासी एक अभियुक्त को बुधवार को जिला सत्र न्यायाधीश ने अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना के वक्त युवक की पत्नी के नाबालिग होने के चलते उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के लिए भेजा गया है। जबकि घटना के दो अन्य अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र निवासी चंद्रप्रकाश मिश्र ने थाने पर तहरीर देकर कहा था कि उसके पुत्र मनोज कुमार मिश्र का विवाह नानपारा के ग्राम बंजरिया निवासी रामसागर की पुत्री रीता देवी के साथ जून 2014 में हुआ था। 22 अप्रैल 2015 को रीता विदा होकर घर आई थी। 23 अप्रैल की रात किसी ने फोन करके मनोज को बुलाया था। जिसके बाद मनोज वापस घर नहीं लौटा।
तलाश करने पर 25 अप्रैल को ग्राम नदईडीह जंगल के पास मनोज की लाश मिली थी। मामले में नानपारा के ग्राम बंजरिया निवासी राममिलन शर्मा, मोतीपुर थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी बृजेश कुमार मिश्र व मोतीपुर के ग्राम जरही निवासी श्यामू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। जबकि हत्या की साजिश में पत्नी रीता देवी को भी शामिल किया गया था।
डीजीसी क्रिमिनल मुन्नूलाल मिश्र व मनोज सिंह ने बताया कि बुधवार को जिला सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान घटना में गवाहों के बयान व साक्ष्य के आधार पर मनोज कुमार मिश्र की हत्या के आरोप में बृजेश कुमार मिश्र को दोषसिद्ध करार दिया गया।
न्यायालय ने बृजेश को आजीवन कारावास, एक लाख रुपये अर्थदंड और आयुध अधिनियम के तहत एक साल की सजा व एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि घटना के समय मनोज की पत्नी रीता देवी के नाबालिग होने के चलते उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को सुनवाई के लिए भेजा गया है। डीजीसी क्रिमिनल मुन्नूलाल मिश्र व मनोज सिंह ने बताया कि साक्ष्य के अभाव में राममिलन शर्मा व श्यामू को दोषमुक्त कर दिया गया है।