मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में वन्यजीव संतुलन में बदलाव का असर अब ग्रामीण इलाकों में साफ नजर आने लगा है। जंगल में बाघों की बढ़ती संख्या और हाथियों की लगातार गतिविधियों के कारण तेंदुओं पर दबाव बढ़ गया है। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में तेंदुए अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
पिछले कुछ समय से तेंदुओं ने जंगल से सटे गांवों के गन्ने के खेतों को अपना अस्थायी आशियाना बना लिया था। घनी फसल उन्हें छिपने और शिकार के लिए अनुकूल वातावरण देती थीं, लेकिन गन्ने की कटाई पूरी होने के बाद उनका यह सुरक्षित ठिकाना समाप्त हो गया।
खाली खेतों के कारण तेंदुए सरयू नदी के कछार क्षेत्र की झाड़ियों में चले गए, लेकिन गर्मी और झाड़ियों की कमी के कारण वहां भी उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकी। ऐसे हालात में तेंदुए फिर से गांवों की ओर बढ़ने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए अब बेखौफ होकर गांवों में घूम रहे हैं और मौका मिलते ही हमला कर रहे हैं। फसलों की कटाई से छिपने के स्थान कम होने के कारण तेंदुए अधिक आक्रामक हो गए हैं। सीमित संसाधनों के चलते वन विभाग भी स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहा है।
कतर्नियाघाट क्षेत्र में बीते दो वर्षों में तेंदुओं की मौत के कई मामले सामने आए हैं। वर्ष 2024 में जनवरी से अप्रैल के बीच पांच तेंदुओं की मौत हुई। वर्ष 2025 में जनवरी से सितंबर तक सात तेंदुओं की मौत दर्ज की गई। वहीं 15 फरवरी 2026 को मनगौढिया गांव के पास खेत में दो तेंदुओं की एक साथ मौत ने हालात की गंभीरता को और उजागर किया।
सेवानिवृत्त वनाधिकारी एमके श्रीवास्तव का मानना है कि जंगल में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, घटता प्राकृतिक आवास और फसलों की कटाई जैसे कारणों से तेंदुए मानव बस्तियों की ओर आ रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गंभीर हो सकता है।
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अगर आपसी संघर्ष है तो अधिक है खतरा
विशेषज्ञ एमके श्रीवास्तव का कहना है कि महराजसिंहनगर गांव के पास गन्ने के खेत में मादा तेंदुआ का शव मिला था, उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाहरी चोट के निशान न मिलने और सभी अंग सुरक्षित पाए जाने के आधार पर विभाग ने मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया है। यदि आपसी संघर्ष में मौत हुई है, तो क्षेत्र में एक से अधिक तेंदुए या अन्य बड़े वन्यजीव सक्रिय हो सकते हैं, जिससे खतरा और बढ़ सकता है।
पिछले वर्षों में तेंदुओं की मौत के प्रमुख मामले
-7 जनवरी 2024 को घायल मिली मादा तेंदुआ की मौत।
-11 जनवरी 2024 को ग्राम रमपुरवा में तेंदुए का शव मिला।
-20 जनवरी 2024 को लालबोझा के चमारनपुरवा के खेत में तेंदुए की मौत।
- 1 फरवरी 2024 को सुजौली के पास तेंदुए की मौत।
-10 अप्रैल 2024 को निशानगाड़ा में नर तेंदुए की मौत।
- 11 जनवरी 2025 को कठौतिया गांव के पास तेंदुए की मौत।
- 3 फरवरी 2025 को भिऊरावीरघाट गांव के पास तेंदुए की मौत।
-7 अप्रैल 2025 को लालपुर चांदाझार बीट में तेंदुए की मौत।
-19 मई 2025 को हरखापुर गांव के पास तेंदुए की मौत।
-12 जुलाई 2025 को निशानगाड़ा रेंज में तेंदुए की मौत।
-13 सितंबर 2025 को ककहरा रेंज में नर तेंदुए की मौत।
-15 फरवरी 2026 को मनगौढिया गांव के पास खेत में दो तेंदुओं की एक साथ मौत।