नानपारा रेंज के बल्दूपुरवा में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजड़े में कैद तेंदुआ।
- फोटो : नानपारा रेंज के बल्दूपुरवा में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजड़े में कैद तेंदुआ।
बहराइच/शिवपुर। ग्राम बल्दूपुरवा के आसपास कई दिनों से दिख रहा तेंदुआ आखिरकार रविवार रात को पिंजरे में कैद हो गया। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। तेंदुआ बीते सप्ताह भर से ग्रामीणों पर और मवेशियों पर हमला कर रहा था। पिंजरे में कैद तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ है।
विकास खंड शिवपुर के ग्राम बल्दूपुरवा, बाजपुरवा और पिपरिया गांवों के आसपास बीते कई दिनों से तेंदुआ दिखने की लगातार सूचना मिल रही थी। नानपारा रेंज की टीम इन क्षेत्रों में सघन गश्त के साथ जागरूकता अभियान चला रही थी और तेंदुए को आबादी से दूर रखने के लिए रात में पटाखे भी छोड़े जा रहे थे। इसी दौरान पांच दिसंबर की शाम बल्दूपुरवा निवासी लल्लू के 10 वर्षीय बेटे अच्छेलाल पर तेंदुए ने हमले का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों की सजगता से वह बच गया। इसके बाद लोगों की मांग पर वन विभाग ने कॉम्बिंग की। तेंदुए के पैरों के निशान के आधार पर बबई नदी के पास गन्ने के खेत में पिंजरा लगाया गया।
उसी पिंजरे में बंधी बकरी का शिकार करने के लिए तेंदुआ रात में अंदर घुसा और कैद हो गया। एहतियातन उसे रात में ही नानपारा रेंज कार्यालय ले जाया गया। सोमवार सुबह उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी नानपारा डॉ. हरीश ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया, स्वास्थ्य जांच में तेंदुआ के नर होने के साथ उम्र करीब 3 से 4 वर्ष के मध्य आंकी गई। डॉक्टरों के मुताबिक तेंदुआ पूरी तरह से स्वस्थ है।
नानपारा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी पीयूष गुप्ता ने बताया कि गन्ने की अधिकता और जंगल की निकटता के कारण तेंदुए अक्सर आबादी की ओर आ जाते हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और ग्रामीणों को हर समय सतर्क रहने को कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मिलने के बाद तेंदुए को नए प्राकृतिक वास स्थल में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाएगा।