मिहीपुरवा। तराई के घने जंगलों में वन्यजीव संरक्षण नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर रेडियो कॉलर जैसी आधुनिक तकनीक से लैस मादा तेंदुए को उसके प्राकृतिक वास में फिर से छोड़ दिया गया, वहीं दूसरी ओर कुछ दिनों पूर्व पकड़े गए दो बाघों को प्राणी उद्यान भेजकर जंगल से स्थायी रूप से अलग कर दिया गया। इन अलग-अलग फैसलों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखीमपुर खीरी के धौरहरा वन रेंज के हौकना बीट से आबादी क्षेत्र में पकड़ी गई मादा तेंदुए को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के सदर रेंज में ट्रांस गेरूआ के पार छोड़ दिया गया। पहली बार किसी तेंदुए को रेडियो कॉलर से लैस कर जंगल में आजाद किया गया है।
रेडियो कॉलर सक्रिय होने के आठ घंटे बाद ही उसकी लोकेशन और मूवमेंट पर जीपीएस के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी शुरू कर दी गई है। प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित के नेतृत्व में पूरी टीम निगरानी में जुटी है।
विभाग का दावा है कि तकनीकी निगरानी से तेंदुआ आबादी क्षेत्र से दूर रहेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका कम होगी।
बाघों के लिए अलग नीति क्यों...
14 नवंबर को मुर्तिहा रेंज के अमृतपुर गांव के पास पकड़े गए अल्पवयस्क नर बाघ को कानपुर प्राणी उद्यान भेज दिया गया। 17 जनवरी को महसी तहसील क्षेत्र से पकड़े गए दूसरे नर बाघ को गोरखपुर प्राणी उद्यान स्थानांतरित कर दिया गया। दोनों बाघ अब अपने प्राकृतिक वास जंगल से दूर सीमित दायरे में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों का सवाल है कि जब तेंदुए के मामले में आधुनिक तकनीक के सहारे पुनर्वास संभव है, तो बाघों के साथ वही रणनीति क्यों नहीं अपनाई गई। बाघ को प्राकृतिक तंत्र से हटाना क्या पारिस्थितिकीय संतुलन पर प्रभाव नहीं डालेगा।
हालांकि वन विभाग का तर्क है कि प्रत्येक मामला परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाता है। संबंधित बाघों को आक्रामक मानते हुए जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया।
फिलहाल तराई के जंगलों में एक तेंदुआ रेडियो सिग्नल के साथ स्वतंत्र विचरण कर रहा है, जबकि दो बाघ प्राणी उद्यानों की सलाखों में हैं। संरक्षण की प्राथमिकताएं परिस्थितियों से संचालित हैं या नीति में दोहरा मापदंड, यह सवाल अब व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
सक्रिय हुआ कॉलर टैग, गेरुआ पार के जंगल में है तेंदुआ
डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि धौरहरा से लाए गए तेंदुए को लगाया गया रेडियो कॉलर टैग सक्रिय हो चुका है। तेंदुआ गेरुआ पार के जंगल में विचरण कर रहा है। उसकी लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा रही है।