पयागपुर (बहराइच)। डॉक्टरों की संवेदनहीनता से फिर एक प्रसूता की मौत हो गई। मामला पयागपुर सीएचसी का है। यहां प्रसव पीड़ा पर लाई गई महिला को डॉक्टरों ने देखा तक नहीं।
स्टॉफ नर्स ने जब एक हजार रुपये वसूल लिए तो प्रसूता का इलाज शुरू किया लेकिन प्रसव के दौरान प्रसूता ने दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए तीमारदारों ने हंगामा किया।
डॉक्टरों व स्टाफ नर्स के खिलाफ नारेबाजी की लेकिन मामले को दबाने के लिए प्रबंधन ने महिला को शव को एंबुलेंस में लादकर उसे घर पहुंचा दिया गया। फिलहाल, बच्चा स्वस्थ है।
पति ने सीएचसी अधीक्षक से शिकायत की है लेकिन अधीक्षक ने सभी आरोपों से किनारा कस लिया है।
पयागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मौहारी कोड़रीताल निवासी सतीश की पत्नी पुष्पा (22) को सोमवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सतीश ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पयागपुर पहुंचाया।
यहां उसे भर्ती किया गया लेकिन करीब पांच घंटे बीतने के बावजूद कोई भी डॉक्टर पुष्पा को देखने नहीं आया, जबकि पुष्पा दर्द से कराहती रही।
सतीश ने मौके पर मिली स्टाफ नर्स स्नेहलता पांडेय से इलाज शुरू करने की मिन्नतें की तो उसने एक हजार रुपये की डिमांड रख दी। सतीश ने स्टाफ नर्स को रुपए दिए। इसके बाद उसने इलाज शुरू किया।
रात करीब 11 बजे प्रसव के दौरान पुष्पा की मौत हो गई। पुष्पा ने बेटा जना है। वह स्वस्थ है। पुष्पा की मौत से गुस्साए तीमारदारों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।
पति सतीश का आरोप है कि स्टाफ नर्स स्नेहलता पांडेय ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की ज्यादा डोज दी है। इसके चलते पुष्पा की मौत हुई।
हंगामा बढ़ता देख मौके पर डॉक्टर व अन्य मेडिकल स्टाफ जुट आया। तत्काल पुष्पा के शव को एंबुलेंस में लादकर घर भेज दिया गया। सतीश ने इसकी शिकायत सीएचसी प्रभारी डॉ एनबी जायसवाल से की है।
एनीमिक थी पुष्पा
सीएचसी अधीक्षक डॉ एनबी जायसवाल ने बताया कि पुष्पा को खून की कमी थी, जिसके चलते मौत हुई है। अवैध वसूली व इलाज में लापरवाही की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। मामले की जांच होगी। इसके बाद कार्रवाई होगी।