जेल में रहेगा सात लोगों का परिवार, उम्रकैद की सजा
हरदी के मैकूपुरवा गांव में 2009 में जेठ की बकरी द्वारा गूथा हुआ आटा खाने को लेकर हुए विवाद में पति ने अपने बड़े भाई के सहयोग से पत्नी की पिटाई कर गला दबाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने हत्या के आरोपी पति और जेठ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपया का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को दो-दो वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दीवानी कचहरी के डीजीसी क्रिमनल संतप्रताप सिंह ने बताया कि 25 मई 2009 को हरदी थाना क्षेत्र के मैकूपुरवा गांव निवासी रामसहारे की पत्नी बसंती ने खाना बनाने के लिए आटा गूथकर रखा था। इसी दौरान जेठ रंगीलाल की बकरी आटा खाने लगी। बसंती ने बकरी के आटा खाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर जेठ से कहासुनी हुई। तभी मौके पर पहुंचे बसंती के पति रामसहारे भी पत्नी पर भड़क उठे।
इसके बाद दोनों भाइयों ने बसंती की पिटाई की और गला दबा दिया। जिससे मौके पर ही बसंती ने दम तोड़ दिया। गांव के इतवारी ठेकेदार की सूचना पर बसंती के पिता रामलाल मौके पर पहुंचे तो बेटी का शव पड़ा था।
इस पर उन्होंने हरदी थाने पर दामाद रामसहारे और जेठ रंगीलाल को नामजद करते हुए केस दर्ज कराया। उसी मामले की फाइल अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट नरेंद्र कुमार के न्यायालय पर पेश हुई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने पति रामसहारे व जेठ रंगीलाल को हत्या के मामले में उम्रकैद और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।