मिहींपुरवा/बिछिया। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य एक बार फिर पर्यटकों के लिए एक नवंबर से खुल जाएगा। छह महीने से अधिक समय तक बंद रहने के बाद अब यह वनक्षेत्र फिर से पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। पर्यटन सत्र का शुभारंभ बहराइच सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड, विधान परिषद सदस्य प्रज्ञा त्रिपाठी और बलहा विधायक सरोज सोनकर संयुक्त रूप से करेंगे।
कतर्नियाघाट अपनी जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। जंगल में सात रेंज मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, धर्मापुर, निशानगाड़ा, सुजौली और कतर्नियाघाट हैं। यहां बाघ, तेंदुआ, गैंडा, जंगली हाथी, बारहसिंगा, सियार, भेड़िया और उड़न गिलहरी जैसे वन्यजीव विचरण करते हैं।
गेरुआ नदी इस अभयारण्य की जीवनरेखा है। इसमें घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुए और कई दुर्लभ जलजीव पाए जाते हैं। इसके अलावा जंगल में 40 से अधिक तितलियों की प्रजातियां और सैकड़ों पक्षियों की प्रजातियां मौजूद हैं।
कतर्नियाघाट आने वाले सैलानियों के ठहरने के लिए थारुहट रेस्ट हाउस सहित कई निजी गेस्ट हाउस संचालित हैं। वन विभाग ने जंगल सफारी के लिए जिप्सी सेवा भी शुरू की है, जिससे पर्यटक जंगल की गहराई में जाकर प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि, गेरुआ नदी में जलस्तर कम होने के कारण इस बार बोटिंग फिलहाल बंद रहेगी। विभाग ने बताया कि जैसे ही नदी का जलस्तर सामान्य होगा, बोटिंग सेवा पुनः शुरू कर दी जाएगी। डीएफओ सूरज कुमार ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।