बहराइच। दिमागी बुखार (जापानी इंसेफेलाइटिस) ने बहराइच में भी दस्तक दे दी है। 15 दिन पहले केजीएमयू लखनऊ भेजे गए 46 बाल रोगियों के सैंपल में से 31 केस पॉजिटिव मिले हैं।
बड़े पैमाने पर दिमागी बुखार से पीड़ित रोगियों के मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने शासन को भी मामले में खबर कर दी है।
बहराइच में हर साल जापानी इंसेफेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) मासूमों के जीवन पर कहर बनकर टूटता है। लेकिन, न तो समय रहते इसके रोकथाम की कार्ययोजना बनती है न ही रोगियों का समुचित तरीके से इलाज हो पाता है।
वर्ष 2014 में 28 रोगियों में जेई व एईएस की पुष्टि हुई थी। इनमें सात रोगियों ने समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ दिया था।
वहीं, दस रोगी ऐसे थे, जो बीमारी से तो उबर गए लेकिन शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम हो गए। इस वर्ष भी कई बच्चों की मौत बुखार से हो गई लेकिन डॉक्टरों ने कागजों पर इसकी पुष्टि नहीं की। इसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी।
डॉक्टरों ने 46 रोगियों में दिमागी बुखार के लक्षण देखकर उनके सीरम मेडिकल विश्वविद्यालय लखनऊ की पैथोलॉजी को भेजे। मंगलवार को जब परिणाम प्राप्त हुए तो सभी के होश उड़ गए।
31 बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है। विभाग की मानें तो रोगियों का उपचार चल रहा है। अभी तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। सीएमओ डॉ. केबी जैन का दावा है कि जेई, एईएस प्रभावित गांवों में फॉगिंग कराई जा रही है।
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औषधियां व आईवी फ्लूड प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। प्रभावित ब्लॉकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर 102 एंबुलेंस की संख्या दोगुनी कर दी गई है। शासन को रोगियों के बाबत पत्र भेज दिया गया है।
विशेष दवा का नहीं है रोल, जांच किट उपलब्ध
मेडिकल विश्वविद्यालय की जांच में 31 रोगियों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है। इस रोग से निपटने के लिए अस्पताल तैयार है। उपलब्ध संसाधनों व कर्मियों की मदद से जेई, एईएस वार्ड का संचालन किया जाएगा। साथ ही जांच किट भी उपलब्ध है। जीवनरक्षक दवाएं पर्याप्त हैं। रोगियों को बेहतर इलाज मुहैय्या कराया जाएगा।
- डॉ. माहेश्वरी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है विपरीत असर
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा कहते हैं कि आमतौर पर इंसेफ्लाइटिस यानी दिमागी बुखार कई बीमारियों का एक समूह है। एक से दस साल उम्र तक के बच्चों के लिए इन मच्छरों का हमला जानलेवा साबित होता हैै।
पच्चीस फीसदी बच्चे मौत का शिकार हो जाते हैं। दिमागी बुखार में सिर में पानी भर जाता है, यानी दिमाग की झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है।
लक्षण दिखने पर तत्काल कुशल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग, पूरी बांह के कपड़े व साफ-सफाई पर विशेष ध्यान और स्वच्छ पानी इस्तेमाल करना चाहिए।
6 ब्लॉक डेंजर जोन में
जिले के 14 ब्लॉकों में सबसे ज्यादा प्रभावित मोतीपुर, बाबागंज, पयागपुर, चित्तौरा, शिवपुर, अमवा हुसैनपुर हैं। बीते तीन साल में सबसे ज्यादा इंसेफेलाईटिस के केस यहीं प्राप्त हुए हैं। इसके चलते स्वास्थ्य महकमे ने इसे डेंजर जोन घोषित किया है।
जेई, एईएस के लक्षण
*बुखार, सिर दर्द, उल्टी, दस्त।
*बोलने की शक्ति प्रभावित हो जाती है।
*हाथ-पैरों का कांपना।
*शरीर में अकड़न।
*मेमोरी लॉस।
*व्यवहारिक परिवर्तन।