बहराइच। मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। जिले के मेडिकल कॉलेज में इन्फ्लुएंजा (वायरल फीवर) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बदलते तापमान और सुबह-शाम की ठंड के कारण बड़ी संख्या में लोग सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 80 से 120 मरीज बुखार, जुकाम, गले में खराश, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, यह वायरल संक्रमण काफी संक्रामक है। यह खांसने, छींकने, संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने या दूषित सतह को छूने से आसानी से फैलता है। यही कारण है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों, स्कूलों और बाजारों में इसके फैलने का खतरा सबसे अधिक है। कई मरीजों में तेज बुखार के साथ सिर दर्द और अत्यधिक थकान देखी जा रही है, जिससे उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज के एमडी मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. एमएम खान ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मधुमेह, अस्थमा, हृदय रोग या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह वायरस अधिक खतरनाक हो सकता है। लापरवाही बरतने पर इन्फ्लुएंजा गंभीर रूप ले सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कहा, यदि लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपचार के बजाय समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
सतर्कता ही बचाव का तरीका
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि बीमारी के लक्षण महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और उपचार शुरू करें। सतर्कता और जागरूकता ही इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमण से बचने का सबसे सटीक और प्रभावी तरीका है।