बहराइच। कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के सभागार में ग्रामीण रोजगार कल्याण अभियान के तहत जैविक खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जैविक खेती से फसलों का उत्पादन बढ़ाने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके पांडेय ने किया।
उन्होंने बताया कि जैविक खेती को प्राकृतिक खेती, कार्बनिक खेती व रसायन विहीन खेती के नाम से जाना जाता है। इसके तहत फसलें गोबर की खाद, मल-मूत्र व पौध आधारित पदार्थों से तैयार की जाती हैं। बताया कि आजकल विषाक्त कीटनाशकों एवं रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति घट रही है। जैविक विधि ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ सकती है।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जैविक खादों के प्रयोग से फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता भी मिलती है। 200 ग्राम राइजोबियम उर्वरक से 10 किलोग्राम बीज का उपचार कर सकते हैं। बीजों को उपचारित करने के लिए किसी साफ जगह पर इकट्ठा कर जैव उर्वरक के घोल को 400 से 500 मिलीलीटर पानी में 50 ग्राम गुड़ मिलाकर 20 मिनट तक गर्म करें।
उन्होंने बताया कि ठंडा हो जाने के बाद 200 ग्राम राइजोबियम डालकर अच्छी तरह से घोलें और धीरे-धीरे हाथ से उलटते-पलटते जाएं जब तक सभी बीजों पर जैव उर्वरक की बराबर परत न बन जाए। इसके बाद किसी छायादार स्थान में फैला कर 10 मिनट तक सुखा लें और उपचारित बीज को प्रयोग में लाएं।
प्रशिक्षण समन्वयक वैज्ञानिक रेनू आर्या ने बताया कि जैविक विधि द्वारा पैदा किया गया अनाज व सब्जियां उच्च गुणवत्ता युक्त होती हैं। तीन दिनों तक चली प्रशिक्षण कार्यशाला में 35 प्रवासी श्रमिकों ने प्रतिभाग किया।