मिहींपुरवा। तराई के घने जंगलों में मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन तेजी से बिगड़ता जा रहा है। हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में बढ़ती मानवीय घुसपैठ अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि लगातार जानलेवा घटनाओं का कारण बन रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क क्षेत्र में बृहस्पतिवार को एक नेपाली महिला की हाथी के हमले में हुई मौत ने इस गंभीर संकट को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथी स्वभाव से शांत होते हैं, लेकिन जब झुंड में बच्चे साथ होते हैं, तो वे किसी भी मानव उपस्थिति को सीधे खतरे के रूप में देखते हैं। ऐसी स्थिति में मामूली लापरवाही भी हिंसक और जानलेवा साबित हो जाती है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग, दुधवा नेशनल पार्क, नार्थ खीरी जोन और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से लेकर नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क तक फैला इलाका हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर है। सदियों से हाथियों के झुंड इन्हीं मार्गों से भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की तलाश में आते-जाते रहे हैं। हाल के वर्षों में इन रास्तों में इंसानी दखल बढ़ने से संघर्ष की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। (संवाद)
एहतियातन बढ़ाई गई सतर्कता
डीएफओ सूरज कुमार ने स्पष्ट किया कि महिला की मौत की घटना नेपाल क्षेत्र की है और इसका कतर्नियाघाट वन क्षेत्र से संबंध नहीं है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर हाथी प्रभावित गांवों में गज मित्रों की तैनाती करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये हाथियों की मूवमेंट की रियल-टाइम जानकारी क्षेत्र में प्रसारित की जा रही है। ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट करने के साथ वन विभाग की टीम नियमित गश्त कर रही है।
पहले चेतावनी देते हैं फिर करते हैं जानलेवा हमला
प्रभागीय वनाधिकारी सूरज कुमार बताते हैं कि हाथी सीधे हमला नहीं करते। वे पहले आवाज कर, झाड़ियों को हिलाकर या सूंड पटक कर चेतावनी देते हैं, लेकिन यदि व्यक्ति पीछे नहीं हटता तो हाथी सूंड से उठाकर पटक देते हैं या पैरों से कुचल डालते हैं। कतर्नियाघाट और उससे सटे नेपाल के राजापुर–बर्दिया क्षेत्र में पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ा रहीं खतरा
वन विभाग के अनुसार लकड़ी बीनने, अवैध शिकार और अनधिकृत आवाजाही जैसी गतिविधियां खतरे को और बढ़ा रही हैं। इसे देखते हुए तराई क्षेत्र में हाथी रिजर्व कॉरिडोर घोषित किया गया है।