मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगल और दो नदियों से घिरे भरथापुर गांव के विस्थापित परिवारों के लिए बसाई जा रही नई बस्ती भरतपुर में गृह प्रवेश की समय सीमा अब नजदीक आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के मुताबिक शारदीय नवरात्र में विस्थापित परिवारों को नए आवासों में प्रवेश कराया जाना है, लेकिन नवरात्र शुरू होने में महज आठ दिन शेष हैं और बस्ती में करीब 75 फीसदी ही निर्माण कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में शेष 25 फीसदी काम को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
भरथापुर गांव में पिछले वर्ष हुए नाव हादसे के बाद ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर बसाने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रशासन ने जमीन चिह्नित करने के बाद आवास, शौचालय, सड़क, नाली, बिजली और पानी समेत अन्य सुविधाओं का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा। स्वीकृति मिलने के बाद नए स्थल पर बस्ती का निर्माण शुरू कराया गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माणाधीन बस्ती का निरीक्षण किया था। इसी दौरान उन्होंने विस्थापित गांव का नाम भरतपुर रखने की घोषणा की थी। जनसभा में मुख्यमंत्री ने आगामी शारदीय नवरात्र में भरतपुर के लोगों का गृह प्रवेश कराने की बात कही थी। इसके बाद से प्रशासनिक मशीनरी निर्धारित समय सीमा में बस्ती तैयार कराने में जुटी है। (संवाद)
सड़क-बिजली का काम पूरा, बाकी निर्माण जारी
वर्तमान में भरतपुर में सड़क और बिजली से जुड़े प्रमुख कार्य पूरे हो चुके हैं। वहीं आवास, शौचालय, नालियां, चारदीवारी, पार्क और अन्य विकास कार्य अभी चल रहे हैं। बस्ती में विस्थापित परिवारों के लिए आवासों के साथ रास्ते, जल निकासी, हरियाली और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। चारदीवारी और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण भी कराया जा रहा है। करीब 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। निर्माण कार्यों की प्रगति की निगरानी जिलाधिकारी स्तर से भी की जा रही है।
इन विभागों की है जिम्मेदारी
राजस्व विभाग
विकास विभाग
लोक निर्माण विभाग
पंचायती राज विभाग
शिक्षा विभाग
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
स्वास्थ्य विभाग
बिजली विभाग
पूर्ति विभाग
18 आवासों का काम पुनर्वास की राशि के इंतजार में
खंड विकास अधिकारी मिहींपुरवा विजय सिंह ने बताया कि भरतपुर में 118 आवासों का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। बाद में स्वीकृत किए गए 18 आवास का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इन आवासों के लिए वन विभाग से मिलने वाली पुनर्वास राशि प्राप्त नहीं हुई है। अन्य विभागों की ओर से कराए जा रहे कार्य निर्धारित समय में पूरा होने की संभावना है।