मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे गांवों में तेंदुओं की दहशत थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते 10 दिनों में लगातार हुए हमलों ने तीन मासूमों ने जान गंवा दी, जिसके बाद सीमावर्ती इलाकों में दहशत और गुस्सा दोनों चरम पर हैं।
पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वन विभाग तेंदुओं को पकड़ने की उम्मीद में अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाकर बैठा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पिंजरा लगाना फौरी कदम भर है, इससे स्थायी समाधान की कोई ठोस तस्वीर नजर नहीं आ रही। जंगल से सटे गांवों में हुए हमलों ने लोगों के दिलों में डर बसा दिया है।
निशानगाडा रेंज के मुखियाफार्म में चार वर्षीय अनुष्का, कतर्नियाघाट के निषादनगर में आठ वर्षीय सुभाष तथा सुजौली के मोहकमपुरवा में छह वर्षीय सहजल की तेंदुए के हमले में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। तीनों घटनास्थलों पर वन विभाग ने पिंजरे लगाकर तेंदुए को पकड़ने की कवायद तेज कर दी है, लेकिन सीमित संसाधन और जनशक्ति की कमी विभाग की मजबूरी बनती दिख रही है।
ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित
ग्रामीणों का आरोप है कि हमलों के बाद केवल औपचारिक कार्यवाही तक ही सीमित रह जाना समस्या का हल नहीं है। खेतों, बस्तियों और सड़क के आसपास बढ़ती तेंदुओं की आवाजाही से लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने के लिए मजबूर हैं। बच्चों को अकेले घर के बाहर भेजने या स्कूल भेजने से परिजन डर रहे हैं। लोगों की दिनचर्या पर भय का साया साफ देखा जा सकता है। वन अधिकारियों का कहना है कि पिंजरे लगाना फिलहाल सबसे त्वरित उपाय है, लेकिन क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगल और सीमित संसाधन बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
डंडा टॉर्च के बिना घर से न निकलें : डीएफओ
प्रभागीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट अपूर्व दीक्षित के बताया कि पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने के प्रयास वन विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है। सरकार द्वारा सहायता राशि दिलाई जाएगी। सभी से अपील है अकेले घरों से बाहर डंडा टॉर्च के बिना न निकालें ।