कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शीकाकाई, गुगची, छड़ीला, तेजपत्ता आदि जड़ी बूटियां पाई जाती हैं। प्रतिवर्ष इन जड़ी बूटियों का ठेका भी होता है। जंगल से जड़ी बूटी निकालने के बाद ठेकेदार उसे सुरक्षित स्थान पर डंप कर सप्लाई करते हैं। यह काम जंगल परिक्षेत्र के गांवों में ही होता था।
हाल ही में जंगल से सटे मिहींपुरवा क्षेत्र में नवीन गल्ला मंडी भवन का निर्माण कराया गया है। इस बार ठेकेदारों ने नवीन भवन में बिना किसी आदेश के जंगल से निकाली गई कई ट्रक जड़ी बूटियों को डंप कर दिया। बीते गुरुवार को मंडी परिषद के उपनिदेशक निर्माण एके कपूर ने नवीन भवन का औचक निरीक्षण किया तब मामला सामने आया।
उप निदेशक ने पूछताछ की तो पता चला कि वसी और गुलाम रसूल द्वारा जड़ी बूटी को मंडी भवन परिसर में डंप किया गया है। भवन की छत पर भी जड़ी बूटी फैली थीं। उप निदेशक के मुताबिक जड़ी बूटी की कीमत लाखों में है। उप निदेशक ने उप जिलाधिकारी और मंडी समिति सचिव को पत्र लिखा।
इसके बाद एसडीएम ने चेतावनी देते हुए जड़ी बूटी को सीज कर दिया है लेकिन सीज होने के बाद भी डंप करने वाले लोग जड़ी बूटी को भवन से अब धीरे-धीरे ठिकाने लगे हैं। इस मामले में एसडीएम घनश्याम का कहना है कि सीजर की कार्रवाई की गई है।