बहराइच। सिखों के प्रथम गुरू व सिख धर्म के प्रवर्तक श्री गुरुनानक देव का प्रकाश पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने लंगर में प्रसाद भी ग्रहण किया। गुरुद्वारों की भव्य सजावट ने आभा और बढ़ाई। फूलों की खुशबू से महकता और झालरों की रोशनी से चमकता गुरुद्वारा भी दूर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार मंदीप सिंह वालिया ने बताया कि हिंदुओं के गुरू, मुसलमानों के पीर, जात-पांत, धर्म भेद मिटाने वाले श्री गुरुनानक देव के 551वें प्रकाश पर्व पर सोमवार को कीर्तन दरबार सजाया गया। दरबार साहिब अमृतसर से रागी जत्था ज्ञानी ओंकार सिंह ने संगत को निहाल किया। कानों में रस घोलती वाहे गुरू, वाहे गुरू... के मधुर स्वर। जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल... का जयघोष। भक्ति और जोश के दिव्य संगम में संगत निहाल हो गई। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर से आए कथावाचक ज्ञानी रेशम सिंह ने श्री गुरुनानक देव के संदेशों का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि गुरुनानक देव ने पूरे विश्व को मानवता का संदेश दिया है। मटेरा, डिहवा, निहालपुरवा, गौरा धनौली, हीरासिंह पुरवा, पयागपुर, फखरपुर से आयी संगत ने श्री गुरुग्रंथ साहिब का माथा टेका। प्रबंध कमेटी की ओर से जिलों के समस्त गुरुद्वारों से आए प्रधानों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद गुरू का लंगर चला। इस मौके पर संरक्षक मंजीत सिंह, महामंत्री भूपेंद्र सिंह वालिया, परमजीत सिंह, जगजीत सिंह, देवेन्द्र सिंह बेदी, माता राजकौर, धर्मवीर सिंह, जगनन्दन सिंह, देवेन्द्र पाल सिंह, मोहन भाटिया, गुरमीत सिंह मिंटू, बाबा अजीत सिंह, हरजीत सिंह, ओंकार सिंह, जरनैल सिंह, उदल सिंह, अमरजीत सिंह, गुरूप्रीत सिंह, बलबीर सिंह, मास्टर सरजीत सिंह, त्रिलोक सिंह, परविंदर सिंह शम्मी आदि मौजूद रहे।