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मंझारा तौकली गांव को लीलने को बेताब दिख रही घाघरा

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बौंडी (बहराइच)। बाढ़ प्रभावित इलाकों में घाघरा का जलस्तर घटना शुरू हुआ है। जिससे कटान भी तेज हो गई है। कैसरगंज के मंझारा तौकली के भिरगूपुरवा और चमरौटी गांव को लीलने के लिए घाघरा बेताब दिख रही है। करीब 80 बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है।
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एसडीएम ने निरीक्षण करते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। ग्रामीण कटान को देखते हुए अपने सामान लेकर पलायन को भी मजबूर हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बरसात के बाद घाघरा नदी में छोड़े जा रहे पानी से जलस्तर में बीते एक सप्ताह से तेजी से इजाफा हो रहा था।
घाघरा का जलस्तर महसी इलाके में तबाही मचाए हुए था। महसी के 10 गांवों में बाढ़ का पानी लोगों की जिंदगी में मुश्किलें बढ़ा रहा था। इसके अलावा 12 अन्य गांव पानी से पूरी तरह से घिरे हुए थे। उधर कैसरगंज में भी बाढ़ का पानी घटना शुरू हुआ है। जिससे नदी ने कटान तेज कर दी है। यहां के मंझारा तौकली में कटान तेज है।
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मंझारा तौकली के मजरा भिरगूपुरवा निवासी संतराम, भगोले, जोखन, सोहन समेत अन्य किसानों की करीब 80 बीघा खेती योग्य भूमि घाघरा की धारा में समाहित हो गई है। भिरगूपुरवा और चमरौटी गांव में नदी लगातार कटान कर रही है।
धान व गन्ने की फसल पूरी तरह से नदी के पानी में डूबी हुई है। जिससे ग्रामीणों में दहशत है। कटान को देखते हुए बुधवार को एसडीएम ने कैसरगंज रामजीत मौर्य ने निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जलस्तर घटने के कारण नदी कटान कर रही है।
सभी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है। जिन लोगों के मकान और खेत कटे हैं, उन सभी की सूची तैयार कर सहायता प्रदान की जाएगी। कैसरगंज क्षेत्र के गुलाबसिंहपुरवा, महावीरपुरवा, रोहितपुरवा, गोड़ियनपुरवा, बलराजपुरवा समेत अन्य कई गांव भी पानी से घिरे हुए हैं। यहां के ग्रामीणों में भी दहशत बनी हुई है।
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