जिला अस्पताल में शुक्रवार रात से जन्म लेने वाले चार बच्चों की मौत हो गई। पर्याप्त उपचार के बावजूद डॉक्टर मासूमों को बचा नहीं सके। उनका कहना है कि चारों बच्चे बर्थ आइसपाक्सिया से पीड़ित थे। तराई में बर्थ आइसपाक्सिया मासूमों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
शनिवार सुबह नानपारा निवासी शब्बीर की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। परिवार के लोग बच्ची के जन्म पर खुश थे लेकिन जन्म के एक घंटे बाद पता चला कि मासूम बर्थ आइसपाक्सिया की चपेट में है। उसकी सांसे उल्टी चलने लगी। शरीर नीला पड़ने लगा। महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने नवजात को चिल्ड्रेन वार्ड भेजा।
वहां इलाज शुरू होते ही मासूम की मौत हो गई। उधर इकौना निवासी राजितराम यादव की पत्नी और रतनपुरवा निवासी मोहम्मद नसीब की पत्नी ने भी बेटी को जन्म दिया। इन दोनाें नवजात की भी सांसें जन्म के दो घंटे बाद टूट गईं। इससे परिवार के लोग बिलख पड़े।
उधर बलरामपुर निवासी यार मोहम्मद की पत्नी ने भी गुरुवार को एक बच्ची को जन्म दिया। बलरामपुर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बर्थ आइसपाक्सिया की शिकायत पर नवजात को जिला अस्पताल बहराइच रेफर कर दिया।
बहराइच में यार मोहम्मद की दो दिन की बेटी हाजरा खातून की भी सांसें थम गईं। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर चले गए। रात से सुबह तक बर्थ आइसपाक्सिया से चार मासूमों की मौत से हड़कंप की स्थिति रही। हालांकि चिकित्सक इन मौतों को सामान्य बता रहे हैं।