जिला अस्पताल में रविवार को बर्थ आइसपाक्सिया से चार और बच्चों की मौत हो गई। दो नवजात ने जन्म के दो घंटे में दम तोड़ दिया। एक बच्चे की आठ दिन व एक अन्य की 23 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए हैं। जिला अस्पताल में ही चार नवजात की जान शुक्रवार को चली गई थी।
जिले में बर्थ आइसपाक्सिया नवजात की जिंदगी के लिए कहर साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में रविवार को खैरीघाट के करीम बख्शपुरवा निवासी वसीम की पत्नी सूफिया ने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के आधे घंटे बाद उसे सांस लेने में तकलीफ हुई। बच्चो रो भी नहीं रहा था।
बाल रोग विशेषज्ञ ने जांच के बाद उसे बर्थ आइसपाक्सिया रोग से पीड़ित बताया। इलाज के दौरान कुछ देर बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसी तरह सोरहवा बेगमपुर निवासी संदीप की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। उसकी भी बर्थ आइसपाक्सिया से एक घंटे बाद मौत हो गई।
उधर नवाबगंज निवासी अंकुश की 23 दिन की बेटी पलक भी बर्थ आइसपाक्सिया की चपेट में आकर जिंदगी मौत से जूझ रही थी। रविवार सुबह उसकी सांसें थम गईं। इकौना की पाले कुंआ निवासी खुशीराम की आठ दिन की पुत्री संजू की भी बर्थ आइसपाक्सिया से मौत हो गई।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि गर्भ के समय मां द्वारा खानपान में की गई लापरवाही व समय पूरा होने के बावजूद सामान्य डिलिवरी के चक्कर में नवजात गर्भ में बर्थ आइसपाक्सिया रोग की चपेट में आ जाते हैं। जिससे उनकी मौत हो रही है। इस मामले में अभिभावकों को सजग होना होगा।