तराई में पल-पल बदल रहे मौसम के बीच डायरिया और निमोनिया बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। निमोनिया और डायरिया से पीड़ित चार मासूमों की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि 18 मरीज और भर्ती हुए हैं। इनमें चार की हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक परिवारीजनों की लापरवाही से बच्चों को अस्पताल लाने में देरी की जाती है, जिससे उनकी जिंदगी खतरे में पड़ती है।
तराई में मौसम निरंतर करवट ले रहा है। बुधवार देर रात करीब 10 बजे अचानक मौसम बिगड़ गया। गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई, जिससे तापमान में तेजी से गिरावट आ गई। मौसम में उतार-चढ़ाव की यह स्थिति निरंतर बनी हुई है। जिसके चलते संक्रामक रोग मुसीबत का सबब बने हुए हैं।
हरदी थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी अरविंद के पांच वर्षीय पुत्र प्रभाकर को बुधवार को तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इस पर परिवारीजनों ने स्थानीय चिकित्सकों को दिखाया। लेकिन लाभ न होने पर देर शाम परिवारीजन बच्चे को लेकर जिला अस्पताल आए। यहां पर चिल्ड्रेन वार्ड के आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, लेकिन गुरुवार सुबह प्रभाकर ने दम तोड़ दिया।
उधर, गिलौला निवासी फारुक अहमद (5) पुत्र नसीब अली को भी बुखार और सांस की शिकायत पर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, हुजूरपुर थाना अंतर्गत कुलेराजपुरवा निवासी राजा (2) पुत्र सतेंद्र व शिवपुर निवासी सुमन (4) पुत्री पप्पू को बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। प
रिवारीजनों ने स्थानीय चिकित्सकों से बच्चों का इलाज शुरू कराया। लेकिन इलाज के दौरान दोनों की हालत बिगड़ गई। जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया तो सभी मासूमों को लेकर जिला अस्पताल रवाना हुए। राजा की रास्ते में मौत हो गई, जबकि सुमन ने अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ दिया।
उधर, निमोनिया, बुखार और डायरिया से पीड़ित और 18 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें चार की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि बुखार और उल्टी दस्त होने पर परिवारीजन उसे हल्के में लेते हैं। जबकि यही लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ती है। ऐसे में सजग रहकर बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है।