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रेंज कार्यालय में ही मादा तेंदुए की निगरानी कर रहे वनकर्मी

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उर्रा (बहराइच)। मुर्तिहा रेंज के गोलहना गांव में पिंजड़े में कैद मादा तेंदुए को रेंज कार्यालय पर ही रखा गया है। वनकर्मी तेंदुए की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण तेंदुए की अधिक उम्र है। जिससे उसे एक या दो वर्ष बाद जंगल में निवास करने के लिए परेशानी होगी। लखनऊ चिड़ियाघर में भी जगह की समस्या है। ऐसे में तेंदुए को कहां छोड़ा जाए, इसके लिए अधिकारियों से वार्ता चल रही है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज अंतर्गत गोलहना गांव में देर रात मादा तेंदुआ पिंजड़े में कैद हो गई थी। तेंदुए को वन क्षेत्राधिकारी एके त्यागी की अगुवाई में रेंज कार्यालय लाया गया। प्रभारी डीएफओ यशवंत सिंह ने बताया कि मादा तेंदुआ की उम्र सात वर्ष से अधिक है। ऐसे में उसे जंगल में छोड़ने पर एक या दो वर्ष बाद परेशानी हो सकती है। उम्र अधिक होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। लखनऊ चिड़ियाघर के अलावा प्रधान वन संरक्षक से वार्ता हुई है। अभी तक तेंदुए को कहां छोड़ा जाए, इसके दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। ऐसे में तेंदुए को मुर्तिहा रेंज कार्यालय पर ही रखा गया है। जिसकी निगरानी वन क्षेत्राधिकारी की अगुवाई में की जा रही है। डीएफओ ने कहा कि चिड़ियाघर में भी जगह को लेकर असमंजस है। ऐसे में उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पर ही तेंदुए को छोड़ा जाएगा। डीएफओ ने बताया कि जहां तक संभावना है, तेंदुए को लखनऊ चिड़ियाघर ही भेजा जाएगा।
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