बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग की सुरम्यता को प्रवासी पक्षियों की आमद ने चार चांद लगा दिए हैं। ठंड बढ़ने के साथ कतर्निया पहुंचे प्रवासी पक्षियों के झुंड को देख कर पर्यटक भी रोमांचित हो रहे हैं। पक्षियों के डेरा जमाने के साथ विदेशी मेहमानों की आमद ने कतर्निया की रौनक और भी बढ़ा दी है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में अलग पहचान बना चुका है। कतर्निया की पहचान यहां के दुर्लभ वन्य जीवों और जलीय जीवों के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन भी रहता है। कतर्निया में इन विदेशी मेहमानों का आगमन प्रतिवर्ष ठंड के मौसम में होता है। अक्तूबर से ही इनका आगमन शुरू हो जाता है जो दिसंबर और जनवरी तक जारी रहता है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग की सुरम्यता को प्रवासी पक्षियों की आमद ने चार चांद लगा दिए हैं। ठंड बढ़ने के साथ कतर्निया पहुंचे प्रवासी पक्षियों के झुंड को देख कर पर्यटक भी रोमांचित हो रहे हैं। प्रवासी पक्षियों में लालसर, नीलसर, सुर्खाब, छोटी लालसर, सफेद जलमुर्गी, अडई, भूरा बत्तख, टकाचोर, सिपाही बुलबुल, मोर, हरा पतरंगा, जंगली मुर्गा, हरियल आदि प्रजाति के पक्षी पहुंचते हैं। इनका आगमन होने से पर्यटक भी रोमांचित हो उठते हैं। कतर्निया घूमने आने वाले पर्यटक जंगल सफारी और बोटिंग के दौरान अक्सर इन्हीं पक्षियों का दीदार करते हैं। कतर्निया के आंबा घाट, महादेवा ताल झील, पूर्व सेंट्रल स्टेट फार्म, लठौवा कठौवा ताल, बगुलहिया फार्म, धरमाप झील, गिरिजा बैराज, कोठियाघाट और गेरुआ नदी के तट पर प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता है।
पनकौआ को किया कैमरे में कैद
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी ने जंगल भ्रमण के दौरान प्रवासी पक्षियों के झुंड को देखा। कतर्निया में बंधे के बगल एक तालाब के किनारे पनकौआ के झुंड को देख उसे कैमरे में कैद किया।