राजीचौराहा (बहराइच)। सिंचाई विभाग द्वारा बेलहा-बेहरौली तटबंध पर रह रहे ग्रामीणों को नोटिस जारी करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को तटबंध पर रहे ग्रामीण नोटिस हाथ में लेकर भड़क उठे। इस दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि पहले जमीन मुहैया कराओ, तब तटबंध से आशियाना हटाएंगे। उन्होंने आरपार के संघर्ष का एलान किया।
महसी तहसील क्षेत्र में बेलहा-बेहरौली तटबंध पर 22 किलोमीटर की दूरी में 24 गांवों के लोग बसे हैं। यह सभी बाढ़ और कटान पीड़ित हैं, जिनके घर और खेत घाघरा नदी में समाहित हो चुके हैं। वर्ष 1965 से लोग बाढ़ और कटान में सब कुछ गंवाने के बाद तटबंध पर आशियाना बनाकर गुजर-बसर कर रहे हैं। लेकिन अब सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों के झोपड़ी से तटबंध के क्षतिग्रस्त होने का आरोप लगाते हुए तटबंध खाली करने का फरमान जारी किया है।
इस मामले में सिंचाई विभाग की ओर से लगभग चार हजार तटबंध के बाशिंदों पर विभागीय मुकदमा चलाया गया है। जिसकी पेशी तीन जून को सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के कार्यालय पर है। नोटिस मिलने से बाढ़ व कटान पीड़ित परेशान हैं।
उनका कहना है कि सरकार ने आज तक जमीन मुहैया नहीं कराई, मकान कहां पर बनाएं। अब झोपड़ी भी छीनने की कोशिश की जा रही है। तटबंध निवासी डल्लाराम, झलारू, राधेश्याम, बाबूलाल, जगजीवन आदि की अगुवाई में दोपहर में तमाम बाढ़ और कटान पीड़ितों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर दो कहा कि पहले जमीन दो, तब ही तटबंध छोड़ेंगे।
उधर, इस मामले में डीएम अजयदीप सिंह का कहना है कि बेलहा-बेहरौली तटबंध जर्जर है। रेनकट और रैटहोल बाढ़ में मुसीबत बन सकते हैं। इसीलिए ग्रामीणों को हटाने की प्रक्रिया की गई है। डीएम बोले कि शासन से बजट मांगा गया है। बजट मुहैया होते ही बाढ़ और कटान पीड़ितों के लिए जमीन खरीदकर उन्हें बसाएंगे।