तराई में बदल रहे मौसम के बीच बुखार और डायरिया कहर बरपाने लगा है। गुरुवार को जिला अस्पताल और ग्रामीण अंचलों में इलाज के दौरान बुखार और डायरिया से पीड़ित पांच मासूमों की मौत हो गई। वहीं, 16 और रोगी जिला अस्पताल में भर्ती हुए। इनमें से तीन की हालत गंभीर होने प उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
तराई में बदल रहे मौसम के बीच संक्रामक रोगों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इसके चलते जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। बुखार और डायरिया की चपेट में एक से 16 वर्ष के बच्चे ज्यादा आ रहे हैं, लेकिन समुचित इलाज के अभाव में उनकी सांसें थम रही हैं।
नानपारा के हंसपुरा निबिया गांव निवासी अवधेश की सात दिन की पुत्री मुन्नी को बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। इस पर परिवारीजन उसे जिला अस्पताल लाए। यहां आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, लेकिन गुरुवार को सुबह मुन्नी ने दम तोड़ दिया। वहीं, रुपईडीहा निवासी सारिक (7) पुत्र मुजीब भी उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित था। स्थानीय डॉक्टरों से परिवारीजनों ने इलाज कराया।
लाभ न होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर इलाज के दौरान सारिक ने दम तोड़ दिया। उधर, बलरामपुर के तुलसीपुर निवासी सब्बू (6) पुत्र मोईन को भी ड्राई डायरिया की शिकायत पर परिवारीजन लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज शुरू होते ही सब्बू की मौत हो गई। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर लौट गए।
वहीं, महसी निवासी छाया (2) व हुजूरपुर निवासी मुन्ना (एक) की भी बुखार और डायरिया की चपेट में आकर मौत हो गई। संक्रामक रोगों से पीड़ित 16 और रोगी जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें तीन की हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ रेफर किया गया है।
जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह का कहना है कि अस्पताल में जिन रोगियों की मौत हुई है, उन्हें काफी गंभीर हालत में लेकर परिवारीजन आए थे। समुचित इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि मिचली, उबकाई और उल्टी के साथ पतली दस्त आना डायरिया के लक्षण हैं। कभी-कभी दस्त की शिकायत नहीं होती। ऐसे में ड्राई डायरिया की संभावना रहती है। इससे शरीर में पानी कम हो जाता है। ऐसे लक्षण दिखने पर रोगी को शिकंजी का घोल पिलाएं। अगर शिकंजी तैयार नहीं कर पाते तो एक चुटकी नमक और तीन चुटकी चीनी का घोल ग्लास में तैयार कर उसे रोगी को पिलाते रहें। इससे मरीज को काफी राहत मिलेगी। जल्द से पीड़ित का विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराएं।