बेलहा-बेहरौली तटबंध बाढ़ और कटान पीड़ितों का आसरा है। 1965 से घर कटने पर लोग छप्पर बनाकर तटबंध पर शरण ले रहे हैं। अब सिंचाई विभाग के सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम ने बाढ़ और कटान पीड़ितों को उजाड़ने के लिए तटबंध क्षतिग्रस्त करने का दोषी करार देते हुए विभागीय मुकदमा दायर किया है।
विभाग की ओर से चार हजार बाढ़ और कटान पीड़ित परिवारों को नोटिस जारी किया गया है। इससे पीड़ित परिवारों में हड़कंप मचा है। नोटिस जारी करने वाले सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम ने जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बहराइच जिले का आधा हिस्सा प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलता है। इनमें महसी, नानपारा और कैसरगंज आंशिक क्षेत्र शामिल है। महसी की एक बड़ी आबादी बाढ़ और कटान की चपेट में आती है। महसी क्षेत्र में लगभग पौने दो लाख लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
स्थिति यह है कि जब वर्ष 1965 से बाढ़ का दौर शुरू हुआ, तब से अब तक 59 गांवों का अस्तित्व मिट चुका है। इनमें से 24 गांव के लोगों ने जिले को बाढ़ की तबाही से बचाने वाले बेलहा-बेहरौली तटबंध को आसरा बनाया।
95 किलोमीटर लंबे बेलहा-बेहरौली तटबंध पर हिंदूपुरवा से अलीपुर दरौना तक 22 किलोमीटर के दायरे में 24 गांव के लोग झोपड़ी बनाकर जिंदगी काट रहे हैं। इन सभी की खेती योग्य जमीन और घर घाघरा की भेंट चढ़ चुकी है। इनमें 24 गांवों के 18 हजार परिवार शामिल है।
इनमें से चार हजार परिवारों को प्रथम चरण में सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के जिलेदार ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही सभी के खिलाफ सिंचाई विभाग के न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। तीन जून 2017 को सभी की पेशी लगाई गई है। हाजिर न होने व जवाब न देने पर एकतरफा कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। ऐसे में पहले से बाढ़ और कटान में सब कुछ गंवा चुके ग्रामीण सकते में हैं।
एक्सईएन सरयू ड्रेनेज खंड प्रथमशोभित कुमार कुशवाहा ने बताया तटबंध और नहर के किनारों पर कब्जा कर अतिक्रमण करना अपराध है। इससे व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। इस मामले में तटबंध को दुरुस्त करने को नोटिस जारी किया गया है। जवाब न देने पर मुकदमा चलाया जाएगा।
52 साल से हम और हमारे पुरखे बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। न घर बचा है और न ही पुश्तैनी संपत्ति। ऐसे में सरकार नोटिस के बजाए इच्छामृत्यु दे दे तो ज्यादा अच्छा है। यह कहना है बांसगढ़ी निवासी भगवानदीन का।
वहीं रामावती, जगदेई और बाबूलाल नोटिस मिलने के बाद परेशान हैं। अरनवा निवासी शिवकुमार और मुरौवा निवासी जयशंकर ने कहा कि हमारी सांसें क्यों चल रही है, इस पर भी नोटिस जारी किया जाए।
इनमें अरनवा, बांसगढ़ी, मुरौवा, मुंसारी, संसारी, कपरवल, पिपरी, गोलागंज, पिपरा, सिलौटा, भौंरी, तिकुरी, पांडेयपुरवा, विशुनपुरवा, मुनुवापुरवा, चुरईपुरवा, मैकूपुरवा, मंगलपुरवा, आशारामपुरवा, कुम्हारनपुरवा, सांवलपुरवा, कायमपुर, सुकईपुर, कटकापुरवा, महेशपुरवा समेत 24 गांव के लोग प्रभावित हैं।