नानपारा (बहराइच)। नानपारा में अग्निशमन केंद्र न होने से प्रतिवर्ष लगभग पांच करोड़ की संपत्ति आग की भेंट चढ़ती है। तनिक सी चूक हुई तो लोगों की जान भी चली जाती है।
काफी दुर्गम क्षेत्र होने के चलते जिला मुख्यालय से जब तक दमकल पहुंचती है। तब तक सब कुछ समाप्त हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए अग्निशमन केंद्र स्थापना की कवायद शुरू की गई है।
इसके लिए ग्राम पंचायत सिलेटनगंज के ग्राम पंचायत की जमीन को चिह्नित किया गया है। तहसील प्रशासन ने इस मामले में प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
नानपारा तहसील जिले की सबसे बड़ी तहसील है लेकिन यहां पर अग्निशमन केंद्र नहीं है। जिला मुख्यालय से तहसील क्षेत्र का अंतिम छोर 120 किलोमीटर पर स्थित है।
इसके अलावा इसी तहसील में कतर्नियाघाट संरक्षित वन प्रभाग भी है। प्रतिवर्ष तहसील क्षेत्र में औसतन 250 अग्निकांड की घटनाएं होती हैं। जिनमें लगभग पांच करोड़ की संपत्ति आग की भेंट चढ़ती है।
अग्निकांड पर जिला मुख्यालय स्थित अग्निशमन केंद्र को सूचना दी जाती है लेकिन जब तक दमकल वाहन पहुंचता है तब तक सब कुछ राख के ढेर में तब्दील हो जाता है।
इस समस्या से निजात के लिए तीन साल पूर्व अग्निशमन केंद्र स्थापना की कवायद शुरू हुई थी लेकिन जमीन ढूंढे नहीं मिल रही थी।
तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत सिलेटनगंज में अब अग्निशमन केंद्र की स्थापना के लिए जमीन मिली है।
ग्राम पंचायत की गाटा संख्या .0491 ख में 1.346 हेक्टेयर जमीन अग्निशमन केंद्र के लिए चिह्नित की गई है। इसका प्रस्ताव ग्राम प्रधान जगमती देवी की अध्यक्षता में पंचायत सदस्यों ने तैयार किया।
प्रस्ताव तहसील प्रशासन को सौंपा गया। इसके बाद जमीन को उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग नानपारा के पक्ष में बैनामा कर दिया गया है।
उपजिलाधिकारी घनश्याम ने बताया कि प्रस्ताव और बैनामे की कॉपी जिलाधिकारी को मुहैया कराई गई है।
जिलाधिकारी ने भी चिह्नित जमीन का हवाला देते हुए अग्निशमन केंद्र की स्थापना का हवाला देते हुए शासन को पत्र लिखा है। शासन से हरी झंडी मिलते ही अग्निशमन केंद्र स्थापना की कवायद शुरू की जाएगी।