नेपाल से बुधवार की सुबह कतर्नियाघाट के जंगल में पहुंचे दो हाथियों ने बिछिया गिरजापुरी मार्ग पर डेरा जमा लिया। इससे मार्ग पर चार घंटे तक यातायात ठप रहा। हाथियों के चिंघाड़ से वनग्राम के लोग दहशत में रहे। हाथियों के हटने के बाद आवागमन बहाल हो सका।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में कारीडोर के रास्ते नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से हाथी व अन्य वन्यजीव आते-जाते रहते हैं। बुधवार की सुबह छह बजे के आसपास नर व मादा हाथी खाता कारीडोर से होते हुए कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के कतर्नियाघाट रेंज में पहुंचे। हाथी घने जंगल से होते हुए बिछिया-गिरिजापुरी मार्ग पर पहुंच गए।
बिछिया बाजार से एक किलोमीटर की दूरी पर नर व मादा हाथी सुबह छह बजे से चिंघाड़ने लगे। मार्ग पर दो हाथियों को देखकर लोगों में दहशत रही। इससे चार घंटे तक आवागमन ठप हो गया। सड़क के दोनों तरफ भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह व गिरिजापुरी चौकी इंचार्ज श्याम नारायण श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे।
चार घंटे तक वनकर्मियों ने हाथियों को जंगल की ओर भेजने के लिए कड़ी मशक्कत की। 10:15 बजे के आसपास दोनों हाथी घने जंगल की ओर गए, तब सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि नेपाली हाथियों के आने के कारण बिछिया, नईबस्ती, टेड़िया समेत अन्य वनग्रामों के लोग दहशत में रहे।
रात में दोनों हाथी गांव पर हमला न करें, इससे सशंकित होने लगे। हालांकि वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि विभागीय टीम गश्त कर रही है। गांवाें पर नजर रखी जा रही है। अगर हाथियों का हमला हुआ तो तत्काल सहायता मुहैया कराई जाएगी।