बहराइच। अब कान की समस्या की जांच के लिए मरीजों को लखनऊ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगेमेडिकल कॉलेज में दिसंबर से बेरा जांच उपलब्ध होगी। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बहराइच में ही बेरा जांच शुरू होने से समय के साथ मरीजों के पैसे की भी बचत होगी।
जिन लोगों को कान से संबंधित समस्या होती है उनके लिए बेरा (ब्रेन स्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री) जांच की जरूरत पड़ती है। लखनऊ में जांच के लिए कई मरीजों को तो पंजीकरण कराने के बाद भी एक साल बाद मौका मिलता था। लेकिन अब जिले में ही यह सुविधा मिलने से मरीजों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी। मेडिकल कॉलेज में बेरा जांच की सुविधा दिसंबर माह से शुरू होगी।
क्या है बेरा जांच
बेरा जांच का पूरा नाम (ब्रेन स्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री) है। यह जांच कानों की सुनने की क्षमता और नसों के जरिए ध्वनि संकेत मस्तिष्क तक पहुंचने की स्थिति का पता लगाने के लिए की जाती है। नवजात शिशुओं में जन्मजात बहरेपन की पहचान करने में यह सबसे उपयोगी टेस्ट है। इसके अलावा कान से संबंधित जटिल बीमारियों और सुनने की कमजोरी की पुष्टि के लिए भी बेरा जांच की जाती है। कई मामलों में यह जांच समय पर इलाज और सुनने की मशीन लगाने में भी उपयोगी साबित होती है।
कैसे होती है बेरा जांच
यह दर्दरहित जांच है। किसी भी सुई का इस्तेमाल नहीं होता न ही ऑपरेशन जैसा कुछ है। मरीज को आराम की स्थिति में लिटाया जाता है। कानों में हेडफोन लगाकर अलग-अलग तरह की आवाजें और बीप साउंड सुनाई जाती है। सिर और कानों के पास छोटे-छोटे इलेक्ट्रोड (सेंसर) चिपका दिए जाते हैं।
ये सेंसर यह रिकॉर्ड करते हैं कि ध्वनि (आवाज) कान से होकर नसों के जरिए दिमाग तक कितनी अच्छी तरह पहुंच रही है। मशीन उस पूरे सिग्नल को कंप्यूटर पर दिखाती है और डॉक्टर रिपोर्ट देखकर तय करते हैं कि सुनने की क्षमता सामान्य है या उसमें कोई कमी है। जांच लगभग 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है।
बनवाया गया है साउंडप्रूफ कमरा, आ गई हैं मशीनें
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय खत्री ने बताया कि बेरा जांच की सुविधा शुरू करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे अनुमोदन मिल चुका है। बेरा जांच में प्रयोग की जाने वाली विशेष कैमरा मशीन भी आ गई है। इसके लिए विशेष साउंडप्रूफ कमरा बनवाया गया है। उन्होंने कहा कि सारी तैयारियां लगभग पूरी हैं। कोशिश है कि दिसंबर से जांच सुविधा मिलने लगे।