बहराइच। जिले में महिलाओं और बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) बड़ी समस्या बन गई है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के मुताबिक जिले में 48.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी मिली है। वहीं छह माह से पांच वर्ष तक के 71.7 प्रतिशत बच्चे भी इस समस्या से पीड़ित मिले हैं। यानी लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला और 10 में से सात छोटे बच्चों के शरीर में खून की कमी पाई गई है। इससे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
डॉक्टर अंजली का कहना है कि गर्भावस्था में खून की कमी होने से प्रसव के समय दिक्कतें बढ़ सकती हैं। समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे का जन्म और ज्यादा रक्तस्राव का खतरा रहता है। वहीं, बच्चों में खून की कमी से कमजोरी, बार-बार बीमार पड़ना और शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग एनीमिया से बचाव के लिए लगातार अभियान चला रहा है। 10 जून से 10 जुलाई तक विशेष अभियान में नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक और आयरन सिरप पिलाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां दी जा रही हैं। जिन गर्भवतियों में खून की कमी ज्यादा होती है, उन्हें आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन भी लगाए जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. संजय शर्मा का कहना है कि केवल दवा से नहीं, बल्कि पौष्टिक भोजन, नियमित जांच और लोगों में जागरूकता बढ़ाकर भी एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
फैक्ट फाइल
05 वर्ष तक के 71.7 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित
49 वर्ष की 48.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी
रक्ताल्पता से ऐसे करें बचाव
-रोज हरी सब्जियां, दाल, चना, गुड़ और अंकुरित अनाज खाएं।
-नींबू, आंवला और संतरा जैसे विटामिन-सी वाले फल लें।
-आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित खाएं।
-गर्भावस्था में समय-समय पर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं।
-बच्चों को समय पर विटामिन-ए और आयरन सिरप जरूर पिलाएं।
-कृमिनाशक दवा समय पर लें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।