बुंदेलखंड में कम हो रही हाथियों की संख्या
कतर्नियाघाट संरक्षित वन इलाके के ट्रांस गेरुआ क्षेत्र में गड्ढे में शनिवार को एक हाथी का शव मिला। उसकी मौत 18 घंटे पहले हो चुकी थी। गश्त के दौरान वनकर्मियों को हाथी की मौत की जानकारी हुई। सूचना मिलने पर दोपहर बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीएफओ के मुताबिक बीमारी से हाथी की मौत हुई है। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत ट्रांस गेरुआ का इलाका गेरुआ नदी के पार है। यह क्षेत्र कतर्नियाघाट सेंक्चुरी और रायल बर्दिया नेशनल पार्क नेपाल के खाताकारीडोर इलाके का रास्ता है। शनिवार भोर में कतर्नियाघाट रेंज की टीम क्षेत्र में गश्त के लिए निकली थी।
मोटरबोट से नदी पार कर टीम उस पार घने जंगल में पहुंची तो कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बीट संख्या एक के कक्ष संख्या एक ए में मृत हाथी दिखाई पड़ा। तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। लेकिन इलाका दुर्गम होने के चलते शनिवार दोपहर बाद दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर सुनील चौधरी, कतर्नियाघाट के डीएफओ जीपी सिंह, एसडीओ पीएन राय, रेंजर आरकेपी सिंह आदि मौके पर पहुंचे। तब पता चला कि हाथी की मौत 18 घंटे पहले हो चुकी है।
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि हाथी की पूछ के पास गहरा जख्म मिला है। जिससे लग रहा है कि जख्म के इंफेक्शन से हाथी की मौत हुई है। उसकी उम्र भी काफी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। डीएफओ ने बताया कि उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है। तीन डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम के लिए गठित हुआ है। देर रात पोस्टमार्टम होने के बाद मौत के कारणों का सही पता लग सकेगा। डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि गेरुआ नदी के पार ट्रांस गेरुआ क्षेत्र में एसएसबी बार्डर आउटपोस्ट से 200 मीटर की दूरी पर एक गड्र्ढा है। उसी में हाथी का शव मिला है। यह टस्कर हाथी है।