सैयद सालार मसऊद गाजी की यौमे पैदाइश का दिन गुरुवार को रहा। इसके चलते देर शाम से शुरू हुआ जियारत का सिलसिला भोर तक चला। पूरे दरगाह शरीफ को चिरागों से रोशन किया गया। गाजी की खिदमत में अकीदतमंदों ने फल-फूल और केक की डालियां पेश कीं। चादर चढ़ाने का सिलसिला भी भोर तक जारी रहा।
सैयद सालार मसऊद गाजी की यौमे पैदाइश का दिन गुरुवार को था। इसके चलते 1033वां जश्न-ए विलादत परंपरागत तरीके से धूमधाम से मनाया गया। गुरुवार की शाम पूरे दरगाह शरीफ परिसर को मोमबत्ती, घी व तेल के दिए से रोशन किया गया।
अपने-अपने अंदाज में अकीदतमंद और जायरीन ने चिराग जलाकर मन्नतें मांगीं। सुख समृद्धि की कामना की। देर शाम से गाजी की खिदमत में फल-फूल और केक की डालियां पेश करने के लिए शहर के विभिन्न मोहल्लों के अलावा फखरपुर, जरवल, कैसरगंज, नानपारा, मिहींपुरवा, नवाबगंज, नेपाल, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा समेत दूरदराज से लोग दरगाह शरीफ पहुंचे। चादर पेश कर गाजी की रहमत और बरकत बरकरार रहने की कामना की।
भोर में चार बजे तक जियारत और मन्नत का सिलसिला जारी रहा। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद अहमद ने बताया कि परंपरागत तरीके से जश्न-ए विलादत का आयोजन हुआ।
जश्न-ए विलादत में शामिल होने के लिए लोग अपनी मन्नतों के अनुरूप दरगाह शरीफ पहुंचे। गिलौला, बलरामपुर और इकौना क्षेत्र के लोगों ने दरगाह शरीफ की पैदल दूरी तय की। उधर, छावनी-दरगाह मार्ग पर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन हाजी रेहान खां ने दरगाह आने वाले जायरीन की खिदमत करते हुए उन्हें पानी पिलाया। फूल-मालाओं से स्वागत किया।