पिछले साल आई बाढ़ के लिए नहरें की कमजोर दीवारें भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। पानी बढ़ने से ये कमजोर दीवारें टूट गईं और कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।
अब जब बाढ़ के हालात फिर से सिर पर हैं तो प्रशासन को नहरें दुरुस्त कराने का ख्याल आया है। लखनऊ से आए विशेषज्ञों ने आठ दिन में बहराइच व गोंडा की नहरों और बैराजों का सर्वेक्षण ड्रोन कैमरों से किया।
दोनों जिलों की नहरें और बैराजों की तस्वीरों कैद कर वीडियो भी बनाया गया है। यह सर्वेक्षण नहरों की व्यवस्था और चाक-चौबंद करने के लिए हुआ है।
साथ ही पंप कैनाल से आने वाली बाढ़ और नहरों के कटने को कैसे रोका जाए, इस पर भी अध्ययन होगा। सर्वे करने वाले विशेषज्ञ इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
जिले में नहरों का जाल बिछा है। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज में घाघरा, मिहींपुरवा में सरयू और श्रावस्ती में राप्ती से नहरों का संचालन होता है।
दोनों जिलों में माइनर और मुख्य नहर मिलाकर लगभग 1600 किलोमीटर नहरें हैं। लगभग यही स्थिति गोंडा की है। वर्ष 2014 में मिहींपुरवा में गोपिया बैराज पर अचानक सरयू नदी का पानी आने से नहरें कट गई थीं और बाढ़ की स्थिति उपन्न हो गई थी।
बड़े पैमाने पर नहरों को नुकसान पहुंचा था। इसका मुख्य कारण नहर की दीवारों का दुरुस्त न होना था।
इस समस्या को देखते हुए इस बार शासन ने मेराकी इंक इंटरनेशनल कंपनी के विशेषज्ञों को बहराइच और गोंडा में नहरों तथा बैराजों की स्थिति का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया।
उसी के तहत विशेषज्ञों की टीम दो ड्रोन के साथ 22 जून को बहराइच आई थी। यहां विशेषज्ञों ने जिले का भ्रमण करने के बाद 26 जून से ड्रोन कैमरों की मदद से नहर और बैराज की तस्वीर लेने का अभियान शुरू किया।
मेराकी कंपनी के विशेषज्ञों के साथ सरयू नहर खंड के जेई रामफल, एनराम, अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड प्रथम उग्रसेन सिंह और सहायक अभियंता मोलहू राम ने भी सर्वेक्षण कार्य में मदद की।
जेई रामफल ने बताया कि टीम के सदस्यों ने घाघरा के उद्गम स्थल चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज, गोपिया बैराज, सरयू नहर रेग्युलेटर, सरयू लिंक सिल्ट इजेक्टर व सरयू मुख्य नहर और माइनरों तथा पंप कैनाल पर ड्रोन उड़ाकर तस्वीरें और वीडियो बनाए। सर्वेक्षण अभियान पूरा कर शुक्रवार शाम टीम वापस लखनऊ लौट गई।
शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
जेई रामफल ने बताया कि ड्रोन कैमरों से जो सर्वेक्षण हुआ है। उसकी रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। उसी के आधार पर नहरों की व्यवस्था और चाक चौबंद करने तथा बैराज पर पानी के निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की कार्य योजना बनेगी।
डाक्यूमेंट्री बनाकर टीवी पर होगा प्रसारण
सरयू नहर खंड के अधिशासी अभियंता देवेश शुक्ला ने बताया कि सरयू नहर परियोजना राष्ट्रीय परियोजना में शामिल हो गई है।
इसके चलते विशेषज्ञों ने नहरों और बैराज की स्थिति का आंकलन करने के साथ ही वीडियोग्राफी की है। इस वीडियोग्राफी से डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की जाएगी, जिसे टीवी पर दिखाकर लोगों को नहरों के बारे में और जानकारी प्रदान की जाएगी।