जिला स्थापना दिवस समारोह रविवार को धूमधाम से मनाया गया। जूनियर हाईस्कूल भिनगा में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत विभागीय स्टालों के अवलोकन से हुई। इसमें सबसे आकर्षित स्टाल बाल विकास एवं पुष्टाहार का पाया गया।
इसके बाद प्रधान, आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी का प्रशिक्षण भी हुआ। इसमें डीएम की क्लास भी चली। 22 मई को ही जिले की स्थापना की गई थी। पहली बार प्रशासन स्थापना दिवस को लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी व प्रशिक्षण दिवस के रूप में मनाया।
जुनियर हाईस्कूल भिनगा प्रांगण में जिले के प्रत्येक विभागों द्वारा अपना स्टाल लगा कर कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। इस दौरान सर्वाधिक आकर्षित स्टाल बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का था।
अभी तक इस विभाग द्वारा मिलने वाले पंजीरी का उपयोग महिलाएं व बच्चे पाउडर के रूप में करते थे वहीं अब डीएम के निर्देश पर इसका व्यंजन भी बनने लगा है। इसके लिए पहले से ही केंद्र वार प्रशिक्षण कराया गया था।
कार्यकर्त्रियां प्रशिक्षण के उपरांत गर्भवती महिलाओं को पंजीरी का व्यंजन बनाकर खाने का प्रशिक्षण देती हैं। आंगनबाड़ियों ने स्टाल पर पंजीरी से बना हैंडमेड बिस्किट, लड्डू सहित 22 प्रकार के व्यंजन बनाए थे। इन व्यंजनों को डीएम समेत सभी अफसरों ने खाया।
कार्यक्रम के दौरान सीडीओ एनपी सिंह, डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव, एडीएम आरबी सोनकर, स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक डा. राजकुमार त्रिपाठी, सर्व शिक्षा अभियान जिला समन्वयक अजीत कुमार उपाध्याय सहित जिले स्तर के समस्त अधिकारी मौजूद रहे।
मनरेगा मजदूरों के लिए श्रम विभाग की ओर से पंजीकरण कैंप लगाया गया था। पंजीकरण के लिए आए 186 मजदूरों ने अपने फावड़े व तसले के साथ मंच के सामने से गुजर कर डीएम को सलामी दी। इस दौरान 184 मजदूरों का पंजीकरण श्रम विभाग में कराया गया। डीएम को फावड़ा व तसला भेंट किया गया।
श्रम विभाग ने स्थापना दिवस पर 181 मजदूरों को साइकिल बांटी। साइकिल पाने वालों में सर्वाधिक मजदूर मनरेगा योजना से संबंधित थे। इसके साथ ही पंचायत राज विभाग ने प्रतीेक के रूप में पचास लाभार्थियों को शौचालय का अनुदान, कौशल विकास मिशन ने पचास प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी का आफर लेटर बांटा।
स्थापना दिवस पर जिले की लगभग चार हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां आशा व एएनएम के साथ लगभग तीन सौ ग्राम प्रधानों ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के लिए डीएम नीतीश कुमार ने मंच पर ही ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था की थी।
आंगनबाड़ियां महिलाओं को क्या क्या और कैसी कैसी जानकारियां दे सकती हैं। जानकारी का स्वरूप कैसा हो, क्या जानकारी तक ही आंगनबाड़ी आशा व एएनएम का कर्तव्य है या फिर जानकारी को महिला व अन्य वर्ग के लोगों के जीवन में कैसे उतारा जाए। इस पर लगभग एक घंटे की क्लास डीएम ने ली।