फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bahraich News: डॉक्टर को दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर, नौ लाख ठगे

Sat, 08 Feb 2025 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। सीएचसी में तैनात चिकित्सक को साइबर ठग ने दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर डराया-धमकाया और नौ लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। जब चिकित्सक को अपने साथ हुई ठगी का पता चला तो साइबर थाना पुलिस से शिकायत कर मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन



शहर के एक मोहल्ला निवासी चिकित्सक ने साइबर थाना पुलिस को शिकायती पत्र देकर बताया कि वे श्रावस्ती जिले में सरकारी चिकित्सक के पद पर तैनात हैं। 29 जनवरी की दोपहर तीन बजे उनके मोबाइल पर अभिराज शुक्ला नाम के व्यक्ति की कॉल आई और उसने बताया कि वह टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बोल रहा है। कहा एक मोबाइल नंबर आपके नाम से रजिस्टर्ड है और आप पर धमकी भरे मैसेज भेजने के आरोप के चलते एफआईआर दर्ज हुई है। जब उन्होंने बताया गया कि वे एक सरकारी चिकित्सक है और उनके नाम दो मोबाइल नंबर ही है। इस पर अभिराज ने दो घंटे में दिल्ली क्राइम ब्रांच हेड ऑफिस पहुंचने नहीं तो दोनों नंबर बंद कर गिरफ्तारी आदेश जारी होने की बात कही।
इतना ही नहीं पहुंचने में असमर्थ बताने पर हॉटलाइन पर क्राइम ब्रांच ऑफिस के अधिकारी से बात कराई। अधिकारी ने बताया आपके नाम पर एचडीएफसी बैंक में एक अकाउंट खोला गया है और उसमें आपकी आधार आईडी और मोबाइल नंबर लगा है। उन्होंने कोई अकाउंट न खोले जाने और मोबाइल नंबर गलत होने की बात बताते हुए आधार कार्ड नंबर सही होने की बात स्वीकारी। इसके बाद अधिकारी ने सरकारी कर्मचारी होने की बात करते हुए मदद का आश्वासन देकर एक वाट्सअप नंबर भेजा और अकेले कमरे में जाकर वीडियो कॉल करने की बात करते हुए नौ लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात पर जालसाजी, धोखाधड़ी, आईटी एक्ट का मामला दर्ज कर लिया है।
विज्ञापन

दिए गए नंबरों का निकलवाया जा रहा डाटा
चिकित्सक को साइबर ठग ने अपने जाल में फंसाते हुए दो दिन तक वाट्सअप कॉल से जोड़े रखा। इसके बाद बातों में उलझाते हुए नौ लाख रुपये हड़प लिए। दिए गए नंबरों का डाटा निकलवाते हुए ठगों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे है। -पंकज सिंह, प्रभारी साइबर थाना


मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर रखा, किया ब्रेनवॉश
चिकित्सक ने कमरे में जाकर वीडियो कॉल की तो दूसरी तरफ पुलिस वर्दी में एक अधिकारी बैठा दिखा जिसने अपना नाम आइपीएस समाधान पवार बताया। इसके बाद उनके नाम से बने बैंक अकाउंट से मनी लॉन्ड्रिंग व ह्यूमन ट्रैफिकिंग गिरोह द्वारा इन लीगल ट्रांजेक्शन किए जाने की बात बताई। जब उन्होंने इससे इन्कार किया तो बोला कि वे दो दिन तक लगातार ऑडियो कॉल पर जुड़े रहे। 31 जनवरी को अधिकारी ने कॉल कर इंडियन बैंक द्वारा भेजे गए बैंक अकाउंट में पैसे भेजने और जांच के बाद वापस लौटाने की बात कही। दबाव में आकर डॉक्टर ने उसी दिन पूना स्थित बैंक खाते में चार लाख रुपये भेज दिए। इसके बाद तीन फरवरी को दोबारा से सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में पांच लाख रुपये भेजने की बात करते हुए नागपुर स्थित बैंक का खाता नंबर दिया। उन्होंने पांच लाख रुपये कुल नौ लाख रुपये उक्त लोगों को ट्रांसफर कर दिेए। बृहस्पतिवार की सुबह जब फोन नहीं उठा तो उन्हें अपने ठगे जाने का पता चला। विदित हो कि बीती 25 नवंबर को साइबर ठग ने इफको सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक को चार दिन डिजिटल अरेस्ट रखते हुए 19 लाख रुपये ठग लिए थे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें