जमीन के विवाद में वर्ष 2003 में जानलेवा हमला कर एक ग्रामीण को लहूलुहान करने के मामले में जिला पंचायत सदस्य और उसके भाई को न्यायालय ने पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। दोषसिद्ध जिला पंचायत सदस्य ओंकारनाथ चौरसिया भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं।
बौंडी थाना क्षेत्र के कनेहरा गांव निवासी मुरारीलाल पुत्र बद्री प्रसाद की जमीन को गांव निवासी शिवकुमार और ओंकारनाथ चौरसिया अपनी बता रहे हैं। इसी मामले को लेकर अरसे से विवाद चल रहा है।
वर्ष 2003 में मुरारीलाल ने जमीन पर पालेसर कारखाना स्थापित कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद और बढ़ गया। जिसके चलते 27 मार्च 2003 को खेत को जाते समय ओंकारनाथ चौरसिया और उनके भाई शिवकुमार ने घेराबंदी कर मुरारीलाल पर कट्टे से फायर किया। फिर कट्टे की बट मारकर लहूलुहान कर दिया। चार माह तक मुरारीलाल का इलाज अस्पताल में चला। इस मामले में बौंडी पुलिस ने केस दर्ज किया था।
इसी बीच बीते वर्ष ओंकारनाथ चौरसिया भाजपा के समर्थन से जरवल के वार्ड नंबर 56 से जिला पंचायत सदस्य पद पर विजयी हुए। इस बीच मुकदमा चलता रहा। केस की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश बृजलाल चौरसिया के न्यायालय पर हुई।
न्यायालय ने प्राणघातक हमले में भाजपा कार्यकर्ता व जिला पंचायत सदस्य ओंकारनाथ तथा उनके भाई शिवकुमार को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, जुर्माने की राशि का आधा हिस्सा न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया है।
भाजपा के बौंडी क्षेत्र के मंडल अध्यक्ष डीपी अवस्थी ने बताया कि ओंकारनाथ चौरसिया भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े थे। वह सक्रिय कार्यकर्ता हैं, मगर पदाधिकारी नहीं हैं।