बहराइच। उत्तर प्रदेश का 2026-27 का बजट विकास और ग्रामीण कल्याण की दिशा में कई योजनाएं लेकर आया है, लेकिन जिले की कुछ चर्चित और बहुप्रतीक्षित समस्याओं पर मौन रहने से जनता में निराशा भी देखी जा रही है। खासकर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी और सीमावर्ती गांवों के मुद्दे पर बजट में कोई प्रत्यक्ष घोषणा नहीं हुई, जिससे स्थानीय लोग मायूस हैं।
कतर्नियाघाट वन क्षेत्र और आसपास के सीमावर्ती गांवों में पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के लिए लंबे समय से योजनाओं की मांग की जा रही है, लेकिन वित्त मंत्री के बजट भाषण में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं दिखाई दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में इस तरह की चूक से सरकार को ग्रामीण विश्वास हासिल करने में मुश्किल हो सकती है। स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वे इन मुद्दों के समाधान के लिए अतिरिक्त कदम उठाएं।