बहराइच। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के जिले के 200 आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) के तहत प्रमाणित करने की शुरूआत की गई है। इसके तहत जिले के आठ आरोग्य मंदिरों का मूल्यांकन किया गया और डीहा आरोग्य मंदिर मानकों पर खरा उतरा है। शेष का मूल्यांकन जारी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बलहा के मंझौवा भुलौरा, चित्तौरा के डीहा, हुजूरपुर के कटघरी और बसंतपुर, जरवल के परसोहर, पयागपुर के मनिकापुर कला कुशभौना, नवाबगंज के सत्तीजोर व शिवपुर ब्लॉक का कोटवा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का मूल्यांकन किया है। इसका मूल्यांकन रिजल्ट बृहस्पतिवार को जारी किया है। इसमें चित्तौरा के डीहा स्थित आरोग्य मंदिर 76.21 प्रतिशत स्कोर पाकर एनक्वास प्रमाणन पर खरा उतरा।
सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि 12 प्रकार की सेवाओं मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, टीकाकरण जैसी सुविधाओं को परखा गया है। इसके आलावा केंद्र की स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, मरीज संतुष्टि, रिकॉर्ड प्रबंधन और चिकित्सा प्रक्रियाओं की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांची गई।
पूर्व में तीन केंद्र कुड़वा, मदरहा और परसेंडी पहले ही एनक्वास प्रमाणित हो चुके हैं। डिस्ट्रिक्ट कंसल्टेंट क्वालिटी एश्योरेंस डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि एनक्वास प्रमाणन के लिए स्वास्थ्य इकाइयों को आंतरिक और बाह्य मूल्यांकन में खरा उतरना अनिवार्य है। प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रति पैकेज 18,000 की दर से सात पैकेज की धनराशि केंद्रों को दी जाएगी।
इसका उपयोग सुविधाओं को और बेहतर बनाने में किया जाता है। यह प्रमाणन तीन वर्षों तक मान्य रहता है। उन्होंने बताया वर्ष 2025 तक 200 इकाइयों के प्रमाणन का लक्ष्य है। पहले चरण में 48 आरोग्य मंदिरों को शामिल किया गया है।