बहराइच। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद भी वन विभाग भेड़ियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहा है। विभागीय सुस्ती स्थानीय लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। भेड़ियों के हमलों में एक के बाद एक मौतें हो रही हैं। सोमवार देर रात बुजुर्ग दंपती की मौत के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को दौड़ा लिया। पथराव कर नारेबाजी भी की। यह गुस्सा एक-दो दिन का नहीं है, पूरे चार महीने का सब्र टूटने का परिणाम है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मंझारा तौकली के गांधी बाजार में आयोजित जनसभा में कहा था कि जनता की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने वन विभाग को मंच से ही निर्देश दिया कि भेड़ियों को पकड़ने की पहले पूरी कोशिश करें। सफलता नहीं मिलने पर गोली मारने से भी परहेज न करें। मुख्यमंत्री के इस आदेश के बावजूद वन विभाग सक्रियता नहीं दिखा सका।
कछार की झाड़ियों और गन्ने की फसल से बच रहे भेड़िये
प्यारेपुर गांव की भौगोलिक स्थिति दुरूह है। गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर सरयू नदी बहती है। चारों तरफ कछार की झाड़ियां हैं और आसपास गन्ने की घनी फसल है। कछार की झाड़ियां और गन्ने की फसल भेड़ियों की सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं।
पीएसी जवानों ने भी संभाला मोर्चा
भेड़िये के हमले के बाद वनकर्मी और पीएसी के जवान सरयू के कछार और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। मंगलवार देर शाम तक एक भी भेड़िया हाथ नहीं आया।
डीएफओ बोले, लोकेशन मिली, चल रही तलाश
गाजीपुर से आए डीएफओ अजीत सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह प्यारेपुर गांव के निकट दो स्थानों पर भेड़ियों की लोकेशन मिली है। पीएसी जवानों के साथ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कोशिश है कि भेड़ियों को पकड़ लिया जाए। अगर वे पकड़ में नहीं आते हैं तो आवश्यक कार्रवाई करते हुए गोली चलानी पड़ेगी। तीन पिंजरे लगाए गए हैं। क्षेत्र में आठ स्थानों पर जाल बिछाए गए हैं।
भेड़ियों के हमले में इनकी हुई मौत
3 जून : गदामार के गढीपुरवा निवासी आयुष (2)।
10 सितंबर : मंझारा तौकली के परागपुर निवासी ज्योति(4)।
12 सितंबर : भौंरी के बहोरवा निवासी संध्या (4 माह)।
20 सितंबर : तौकली गंदूझाला निवासी अंकेश (3)।
24 सितंबर : बाबा बंग्ला मंझारा तौकली निवासी सोनी (2)।
30 सितंबर : प्यारे पुरवा निवासी खेदन (75) और पत्नी मनकी (70)।