बहराइच। बदलती जीवनशैली लोगों की मानसिक सेहत के साथ ही जिंदगी के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो रही है। यह छोटी-छोटी सी बात पर व्यक्ति को आत्मघाती कदम उठाने की ओर धकेल रही है। जिले में सामने आईं आत्महत्या की घटनाओं की वजह इस ओर इशारा करती है।
बहराइच में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच आत्महत्या से जुड़े 137 मामले सामने आए। औसतन हर 2.6 दिन में एक मामला सामने आया। इनमें फंदा लगाकर जान देने वालों की संख्या अधिक है। यह आंकड़ा मेडिकल कॉलेज में जिले भर से आने वाले मामलों पर आधारित है।
मनोचिकित्सक डॉ. विजित जायसवाल के मुताबिक तेजी से बदलती जीवनशैली का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। गांवों में संयुक्त परिवारों का कमजोर होना, रोजगार के लिए युवाओं का बाहर जाना, परिवार से दूरी, आर्थिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं तनाव बढ़ा रही हैं। कई बार व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर लंबे समय से किसी समस्या से जूझ रहा होता है।
व्यक्ति को अकेला न छोड़ें
यदि किसी व्यक्ति में आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने का तत्काल खतरा दिखाई दे तो उसे अकेला न छोड़ें और तत्काल नजदीकी अस्पताल की आपात सेवा या स्थानीय आपात सहायता से संपर्क करें। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए हेल्पलाइन 14416 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
किशोरों में भावनात्मक सहनशीलता बड़ी चुनौती
किशोरावस्था में भावनात्मक नियंत्रण पूरी तरह विकसित नहीं होता। पढ़ाई, परीक्षा, कॅरिअर, दोस्ती, प्रेम संबंध, परिवार की अपेक्षाएं और सोशल मीडिया का दबाव तनाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे समय में परिवार को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उसके मन में वास्तव में क्या चल रहा था।
खतरे के संकेत पहचानें
जिला चिकित्सालय के मनोरोग चिकित्सक डॉ. विजित जायसवाल के मुताबिक व्यवहार में अचानक बदलाव आत्महत्या के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। लगातार उदासी, लोगों से दूरी बनाना और नींद या खान-पान में बड़ा बदलाव इन संकेतों में शामिल हैं। अत्यधिक चिड़चिड़ापन, निराशा की बातें करना या खुद को दूसरों पर बोझ बताना भी खतरे का संकेत है। बार-बार मौत की बात करना या जरूरी सामान दूसरों को सौंपना भी गंभीर चेतावनी है। ऐसे कई संकेत एक साथ दिखें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डांटने के बजाय बातचीत करना अधिक महत्वपूर्ण है।
परिवार की भूमिका और बचाव
यदि कोई कहे कि ‘मैं मर जाऊंगा’ या ‘अब जीने का मन नहीं है’ तो ऐसी बात को मजाक न समझें। शांत होकर उसकी बात सुनें और उसे अकेला न छोड़ें। जरूरत पड़ने पर तत्काल विशेषज्ञ या आपात सहायता लें। परिवार को व्यक्ति की बात सुनने की आदत विकसित करनी चाहिए। बिना जज किए परेशानी सुनना और समय रहते विशेषज्ञ तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। गुस्से में अपमान, धमकी और कठोर शब्दों से बचना चाहिए। परिवार का माहौल ऐसा होना चाहिए, जिसमें व्यक्ति बिना डर अपनी समस्या बता सके।
आठ माह में 137 मामले
बहराइच में आत्महत्या के मामले बहराइच में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच कुल 137 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। मार्च माह में सबसे अधिक 22 मामले सामने आए। जनवरी में 18, फरवरी में 14 और अप्रैल में 19 मामले दर्ज हुए। मई में 16, जून में 15 और जुलाई में 17 मामले थे। अगस्त में 16 मामले सामने आए। यह आंकड़ा मेडिकल कॉलेज में आने वाले मामलों और ग्रामीण क्षेत्रों से शव परीक्षण के लिए आने वाले मामलों पर आधारित है।
क्या करें-
परेशान व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें।
खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करने वाले व्यक्ति को अकेला न छोड़ें।
परिवार के भरोसेमंद सदस्य को जानकारी दें।
जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
बच्चों और किशोरों के व्यवहार में अचानक बदलाव को नजरअंदाज न करें।
क्या न करें
- ‘तुम सिर्फ ध्यान खींच रहे हो’ कहकर बात न टालें।
आत्महत्या या मौत की बात को मजाक न समझें।
डांट, ताना या अपमान से स्थिति संभालने की कोशिश न करें।
मानसिक परेशानी को कमजोरी मानकर छिपाने की कोशिश न करें।
मदद की जरूरत हो तो
मार्च में सबसे ज्यादा 22 मामले
माह
मामले
जनवरी
18
फरवरी
14
मार्च
22
अप्रैल
19
मई
16
जून
15
जुलाई
17
अगस्त
16
कुल
137