तराई में हो रही वर्षा के बीच निकल रही धूप के साथ डेंगू का प्रकोप शुरू हो गया है। बाढ़ प्रभावित इलाके का एक मरीज लखनऊ पहुंचा है। इसकी रिपोर्ट गुरुवार को सीएमओ को मिली तो स्वास्थ्य महकमा सकते में आ गया। आनन-फानन में जिले में अलर्ट घोषित करते हुए जिला अस्पताल में 10 बेड का वार्ड स्थापित किया गया है। डॉ. राकेश को इसका प्रभारी बनाया गया है। डेंगू को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समुचित दवाएं और जांच किट मुहैया होने का दावा कर रहे हैं।
तराई में प्रति वर्ष दिमागी बुखार और डेंगू कहर बरपाता है। वर्ष 2016 में लगभग तीन हजार लोगों के खून की जांच हुई थी। इनमें 650 बुखार पीड़ित डेंगू पाजिटिव मिले थे, जिनमें अधिकांश इलाज कराने के लिए लखनऊ चले गए थे। जिला अस्पताल में महज 48 मरीज भर्ती हुए थे। वहीं, आठ लोगों की मौत की जानकारी हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में मौतें शून्य हैं।
इस बार फिर वर्षा के बीच निकल रही तेज धूप के साथ डेंगू ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। महसी तहसील का 28 वर्षीय एक मरीज बुधवार को लखनऊ पहुंचा। केजीएमयू में परीक्षण के दौरान उसके डेंगू ग्रसित होने की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट गुरुवार मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को भेजी गई। आनन-फानन में जिला अस्पताल में 10 बेड का विशेष डेंगू वार्ड स्थापित किया गया है। साथ ही सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
सीएमओ डॉ. अरुणलाल का कहना है कि बहराइच का एक रोगी डेंगू से पीड़ित लखनऊ में मिला है। इसकी रिपोर्ट लखनऊ से भेजी गई है। इसके अलावा अभी अन्य किसी भी रोगी में डेंगू के लक्षण नहीं मिले हैं। फिलहाल सजगता बरती जा रही है। टॉस्क फोर्स टीम गठित है। दवाएं और जांच किट भी पर्याप्त मात्रा में मुहैया हैं।
ग्रामीण अंचलों और कस्बों की बात छोड़ दें तो जगह-जगह शहर में जलभराव की स्थिति है। शहर में गोंडा रोड पर एचडीएफसी बैंक के सामने घुटनों पर पानी भरा है। इसके अलावा बड़ीहाट, बख्शीपुरा, घसियारीपुरा मोहल्लों में लोग जलभराव के बीच जीवनयापन करने को मजबूर हैं।
जलभराव के चलते डेंगू फैलता है। इस कारण महसी, कैसरगंज, नानपारा, मिहींपुरवा, रुपईडीहा और नवाबगंज इलाकों में डेंगू के मरीज प्रति वर्ष काफी मात्रा में मिलते हैं।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय ने कहा कि डेंगू से बचने का उपाय करें, लेकिन अगर लक्षण की पुष्टि होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। जिला अस्पताल में समुचित इलाज की व्यवस्था है। अलग वार्ड स्थापित कर दिया गया है। प्रभारी चिकित्सक डॉ. राकेश मातनहेलिया की तैनाती की गई है। समुचित जांच और दवाएं मुहैया हैं। झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें।
यह हैं लक्षण
- निरंतर बुखार रहना व शरीर पर लाल चकत्ते निकलना।
- भूख बिल्कुल न लगना।
- कमजोरी के साथ चक्कर आने की शिकायत होना।
- मिचली होना व आंखों में लालपन आना।
- प्लेटलेट्स की मात्रा में लगातार गिरावट होना।
बचाव के उपाय-
- घरों के आसपास जलभराव न होने दें।
- छत पर खाली टायर, खुले बर्तन में यदि पानी भरा हो तो उसे फेंक दें।
- घर के आसपास चूने और एंटी लॉर्वा का छिड़काव करें।
- बुखार होने की दशा में मनमानी दवा न कर योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं।