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Bahraich News: करोड़ों खर्च, फिर भी बंद पंचायत भवन

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 शिवपुर के ग्राम पंचायत बहोरिकापुर में ग्राम सचिवालय पर बंद ताला।
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शिवपुर। सरकार गांवों में बेहतर सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन शिवपुर विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। पड़ताल में पंचायत भवनों पर ताले लटके मिले, कूड़ा पृथक्करण केंद्र वर्षों से बंद मिला, इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े मिले और नालियां गंदगी से पटी दिखीं। ग्रामीण छोटे-छोटे काम के लिए भी ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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गांव में बना कूड़ा पृथक्करण केंद्र भी पूरी तरह निष्क्रिय है। केंद्र पर धूल जमी है और लंबे समय से यहां कोई गतिविधि नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यहां कभी नियमित रूप से कूड़ा नहीं लाया गया। कोटवा गांव की अधिकांश नालियां गंदगी से भरी मिलीं। नियमित सफाई न होने से जलभराव और बदबू की समस्या बनी हुई है। गांव के संतोष और जगदीश ने बताया कि सफाईकर्मी कई दिनों से गांव नहीं आए हैं।

बंद मिला पंचायत सचिवालय

पड़ताल की शुरुआत बहोरिकापुर ग्राम पंचायत से हुई। यहां पंचायत सचिवालय पर ताला लटका मिला। सुबह 11 बजे न तो ग्राम विकास अधिकारी मौजूद थे और न ही पंचायत सहायक। गांव के राधेश्याम और राजकुमार ने बताया कि अधिकतर दिनों में सचिवालय बंद ही रहता है। इससे प्रमाणपत्र, आवेदन व अन्य जरूरी कार्यों के लिए ब्लॉक जाना पड़ता है।
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खराब हैंडपंप से पेयजल संकट
बहोरिकापुर में कई इंडिया मार्का हैंडपंप खराब मिले। भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रखरखाव के नाम पर खर्च तो दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता।

कोटवा में भी सचिवालय पर ताला
कोटवा ग्राम पंचायत में भी पंचायत भवन बंद मिला। गांव के सुंदरलाल ने बताया कि पंचायत स्तर पर होने वाले अधिकांश कार्य नहीं हो पाते, इसलिए उन्हें ब्लॉक कार्यालय जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।


जांच के दिए गए निर्देश

शिवपुर के खंड विकास अधिकारी आलोक वर्मा ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। एडीओ पंचायत को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बंद पंचायत भवनों को नियमित रूप से संचालित कराने, खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
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