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सरयू नहर साइफन की मेड़ पर मिला मगरमच्छ का घोंसला, निकले दो बच्चे

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उर्रा (बहराइच)। ककरहा रेंज के सरयू नहर साइफन के किनारे सोमवार शाम मगरमच्छ का नेस्ट खुला तो दो नन्हें बच्चे बाहर निकले। आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीण बच्चे व अंडे देखकर हतप्रभ रह गए। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
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अंडो से सुरक्षित निकले दो बच्चों को ग्रामीणों ने सरयू नहर में छोड़ दिया जबकि 14 अंडे मौके पर हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र दुर्लभ वन्यजीवों के साथ जलीय जीवों के लिए भी जाना जाता है। सोमवार शाम को ककरहा रेंज के गोपिया साइफन के निकट गांव के लोग मवेशियों को घास चरा रहे थे।
कुछ लोग अपने खेतों में काम कर रहे थे। तभी साइफन मार्ग से गुजर रहे लोगों ने अजीब सी आवाज सुनी। लोग आवाज की दिशा में आगे बढ़े तो मगरमच्छ का नेस्ट देखकर चौंक गए। नेस्ट से दो बच्चे निकलकर नहर की ओर बढ़ रहे थे जबकि मौके पर 14 अंडे मौजूद थे।
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कुछ अंडों में दरारें भी दिखीं। इस पर ग्रामीणों ने सूचना रेंज कार्यालय को दी लेकिन देर शाम तक कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा था। एसडीओ यशवंत सिंह से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि सूचना मिली है।
टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। उधर वनकर्मियों का इंतजार बढ़ने के चलते ग्रामीणों ने घोंसले से निकले मगरमच्छ के दोनों बच्चों को सरयू नहर में सुरक्षित छोड़ दिया।
एसडीओ यशवंत सिंह ने बताया कि मगरमच्छ और घड़ियाल दोनों के प्रजनन काल का समय 70 दिन होता है। 70 दिन बाद नेस्ट के अंदर से आवाजें आने लगती हैं। तब मादा पहुंचकर ऊपर से बालू हटाती है। जहां पर नेस्ट खुला है, उस जगह आसपास कहीं न कहीं मादा मगरमच्छ होगी। उसी के चलते अंडे सुरक्षित हैं। ऐसे में ग्रामीणों को सजग रहना होगा।
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