उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग से सवा किलो विस्फोटक की तस्करी कर नेपाल ले जा रहे तस्कर को शनिवार को एसएसबी के जवानों ने इंडो-नेपाल सीमा पर दबोच लिया। तस्कर रजाई में विस्फोटक छिपाकर ले जा रहा था। डॉग स्क्वॉयड की जांच में वह हत्थे चढ़ा। युवक को गिरफ्तार कर विस्फोटक को सीज कर दिया गया है।
भारत-नेपाल सीमा पर रुपईडीहा कस्बे में एसएसबी सातवीं वाहिनी के बॉर्डर आउटपोस्ट पर शनिवार दोपहर यात्रियों की तलाशी हो रही थी। इसी दौरान रुपईडीहा की ओर से एक नेपाली युवक रिक्शे पर रजाई व अन्य सामान लेकर नेपाल की ओर जाता दिखा।
एसएसबी के सहायक सेनानायक विपिन शर्मा की अगुवाई में टीम और डॉग स्क्वायड हैंडलर श्याम प्रकाश सिंह ने उसके सामान की तलाशी शुरू की तो एक्सप्लोसिव विशेषज्ञ डॉग फौजी ने रजाई की ओर संकेत किया। जवानों ने रजाई खोलकर जांच शुरू की गई तो रजाई के फर और रुई के बीच में छड़नुमा वस्तु होने का एहसास हुआ।
रजाई की सिलन तोड़ने पर उसमें से नौ बंडल में बंधे 125 डेटोनेटर, 37.5 फीट सेफ्टीफ्यूज, एक पीस डेटोनेटर नान वायर बरामद हुआ। लगभग एक किलो 125 ग्राम विस्फोटक एसएसबी के हाथ लगा। युवक की पहचान दीपेंद्र राज हिमाल पुत्र बल बहादुर हिमाल निवासी वार्ड नंबर एक मनमोह कालीकोट नेपाल के रूप में हुई।
दीपेंद्र ने बताया कि वह उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग स्थित जरखौली नामक स्थान पर पीडब्ल्यूडी में दैनिक मजदूर के रूप में काम करता है। दो माह पूर्व वह रुद्र प्रयाग गया था। पहाड़ तोड़ने के लिए जिस विस्फोटक का प्रयोग होता था, उसे थोड़ा-थोड़ा चुराकर उसने इकट्ठा कर लिया था।
इसी विस्फोटक को वह नेपाल ले जा रहा था। एसएसबी के सहायक सेनानायक विपिन शर्मा ने बताया कि बरामद विस्फोटक को सीज कर पकड़े गए नेपाली युवक को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत जेल भेज दिया गया है।
पहाड़ तोड़ने में किया जाता है प्रयोग
नेपाली युवक दीपेंद्र के पास से बरामद विस्फोटक का प्रयोग पहाड़ तोड़ने में किया जाता है। दीपेंद्र ने बताया कि वह कालीकोट में किराये के मकान में रहता है। अपना मकान बनाने के लिए पहाड़ तोड़ने की जरूरत है, जिसमें काफी खर्चा आता है। ऐसे में विस्फोटक को चुराकर वह कालीकोट में पहाड़ तोड़कर मकान बनाता।