उर्रा गांव निवासी 11 किसानों के खेतों में मनरेगा के तहत बागवानी के नाम पर छह लाख रुपये निकाल लिए गए। बाग की हकीकत जांचने के लिए मनरेगा टीम जब गांव पहुंची, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। एक भी किसान के खेत में आम, अमरूद व अन्य पेड़ नहीं लगे मिले। किसानों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने बागवानी के लिए आवेदन ही नहीं किया।
मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत उर्रा गांव निवासी 11 किसानों के खेतों में बागवानी के नाम पर अज्ञात लोगों ने छह लाख का कर्ज मनरेगा से ले लिया। बागवानी के लिए यह ऋण मनरेगा के तहत किसानों के खेतों के खसरा व खतौनी पर दिया गया। लेकिन इस ऋण का पता वास्तविक किसानों को नहीं लग सका। ऋण की छह लाख की राशि नर्सरी संचालक और अन्य एजेंसियों के खाते में भेज दी गई।
छह माह बीतने पर जब बागवानी के स्थलीय परीक्षण के लिए मनरेगा की टीम गांव पहुंची, तो जिन खेतों के खसरा खतौनी लगे थे। उन खेतों में एक भी बागवानी के पौध नहीं मिले। टीम ने गांव में संबंधित किसानों से बागवानी के लिए लिए गए ऋण और पौधरोपण न करने पर जब पूछताछ की तो किसानों ने बताया कि उन्हें ऋण की जानकारी नहीं है। जांच के दौरान पता चला कि फर्जी तरीके से किसानों का खसरा-खतौनी निकलवाकर बागवानी के लिए छह लाख रुपये ऐंठ लिए गए हैं।
इस मामले में अन्य ग्रामीणों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज करने के बाद टीम ने फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी। फर्जीवाड़े के कागजात में आवेदन के तहत 16 मार्च 2015 में कागजों पर खेत में पौधरोपण किया गया। जबकि बिना जांच के 28 जनवरी 2016 को भुगतान भी कर दिया गया।
संबंधित कागजात में पूर्व प्रधान कैलाश निगम, वर्तमान प्रधान सुंदरपता, पंचायत मित्र अनीता मौर्या, तत्कालीन वीडीओ आरपी सिंह के हस्ताक्षर भी हैं। उधर, वर्तमान प्रधान, पूर्व प्रधान व पंचायत मित्र ने किसानों के खेत में बागवानी के लिए किसी भी कागजात पर हस्ताक्षर बनाने से इन्कार कर दिया।
वहीं, इस मामले में वीडीओ सोहन सिंह ने बताया कि बगीचे में नर्सरी लगवाने के नाम पर कागजों में लखनऊ के मलिहाबाद से नर्सरी मालिक सलीम के यहां से लाने तथा मिहींपुरवा से खाद और बहराइच से बोर्ड लगवाने की रसीद लगाई गई है। जबकि मौके पर कुछ नहीं मिला।
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इन किसानों के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा
उर्रा गांव निवासी राधेश्याम, यासीन, रामप्रसाद, रामबचन, तूफानी, राममिलन, बिरजा, चेतराम, तेजकुमार, सुंदरलाल, हरीशचंद्र आदि किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रुपये निकाले गए।
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पंचायत मित्र ने भेज दिया गेहूं का फोटो
मनरेगा से जब क्षेत्र की पंचायत मित्र अनीता से बागवानी की फोटो मांगी गई तो उसने गेहूं के खेत की फोटो भेज दी। इसके बाद अधिकारियों को शक हुआ तो मौके की जांच कराई गई। तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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चल रही मामले की जांच, होगी कार्रवाई
उर्रा में मनरेगा के तहत बागवानी के लिए बजट का आवंटन हुआ था। लेकिन मौके पर बागवानी नहीं पायी गयी। ऐसे में गड़बड़ी कहां पर हुई है, इसकी जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राकेश कुमार, मुख्य विकास अधिकारी