प्रसूताओं की मदद के लिए चल रही जननी सुरक्षा योजना में अफसरों ने फर्जी नामों से भुगतान कर सरकार को सात करोड़ रुपए का चूना लगा दिया। 52 हजार 433 महिलाओं को 1400 रुपये के चेक बिना सत्यापन ही बांट दिए गए।
इनमें ज्यादातर महिलाएं योजना के लिए अपात्र पाई गई हैं। घोटाले की पुष्टि देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक एवं परिवार कल्याण डॉ उमाकांत वर्मा की प्राथमिक जांच में हुई है।
एडी ने नोडल अधिकारी डॉ पीके अग्रवाल पर कठोर कार्रवाई के लिए मिशन निदेशक को पत्र भेजा है।
फखरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन बौंडी अतिरिक्त हेल्थ सेंटर पर बौंडी निवासी ननकई (60) को दस माह में पांच मर्तबा जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के इस कारनामे से प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के निदेशक अमित घोष ने अपर निदेशक एवं परिवार कल्याण डॉ उमाकांत वर्मा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी।
गौरतलब है कि तीन जुलाई को डॉ. वर्मा एनएचएम के मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक, जिला प्रबंधक और सीएमओ की टीम के साथ के साथ बौंडी पहुंचे। यहां एडी ने जननी सुरक्षा योजना के अभिलेखों की जांच की तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
फर्जी तरीके से ननकई को प्रसूता दिखाया गया, साथ ही अकाउंट न होने की बात कहकर अन्य महिला को योजना का लाभ दिया गया है। यहां बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है।
इस अनियमितता के लिए एडी ने एएनएम व लिपिक को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, अपर निदेशक ने गत वित्तीय सत्र में जिले भर में हुए 52 हजार 433 प्रसवों को संदेह के घेरे में लिया है।
जांच नतीजों के अनुसार 7 करोड़ 34 लाख 62 सौ रुपये का खेल प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत से हुआ है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर कभी पहुंचे ही नहीं नोडल अफसर
स्वास्थ्य केंद्रों पर जननी सुरक्षा योजना में धांधली होती रही लेकिन नोडल अधिकारी डॉ. पीके अग्रवाल ने इस योजना की न तो कभी समीक्षा बैठक बुलाई और न लाभार्थियों का सत्यापन कराया।
यहां तक कि नोडल अधिकारी ने कभी स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा भी नहीं किया। एडी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नोडल अधिकारी पर कठोर कार्रवाई के लिए मिशन निदेशक को पत्र भेज दिया है।
गलत तरीके से हुआ भुगतान
जननी सुरक्षा योजना के पारदर्शी बनाए जाने के लिए गत सत्र में अकाउंट पेई चेक से लाभार्थी को भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जिले में लाभार्थियों को बियरर चेक से भुगतान किया गया है।
वहीं, वित्तीय सत्र 2015-16 में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) द्वारा भुगतान करने का निर्देश हुआ। फिर भी घोटाले की पटकथा लिखने के लिए अधिकारियों ने गलत तरीके से भुगतान किया। एडी ने इसे बड़ी चूक माना है।
10% लाभार्थियों के सत्यापन का निर्देश
अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ उमाकांत वर्मा ने बताया कि सीएमओ डॉ केबी जैन को इस तरह की अनियमितता की जांच के लिए टीम बनाने का निर्देश दिया गया है।
यह टीम प्रत्येक ब्लॉक में दस फीसदी जेएसवाई लाभार्थियों का सत्यापन करेगी। यह जांच रिपोर्ट शासन को भेजने का निर्देश दिया गया है।