इकौना (श्रावस्ती)। नए साल की शुरुआत भगवान प्रभुनाथ के आशीर्वाद के साथ करेंगे। ये भावना लेकर मंगलवार को 12 लोग घर से निकले थे लेकिन क्या पता था कि प्रभुनाथ धाम की यात्रा जीवन की अंतिम यात्रा साबित हो जाएगी।
जल्द लौटने का आश्वासन देकर सभी ने अपनों से विदाई ली थी पर घर लौटकर आईं उनकी लाशें। हे प्रभु... आखिर कउने बात की सजा हमरे बेटे का दी। हे भगवान ई का होई गवा... अब बच्चन का के देखी...।
इन चीत्कारों से इकौना के सेमगढ़ा, चाईपुरवा, सौरूपुर व जयचंद्रपुर कटघरा गांव गूंज रहे हैं। सेमगढ़ा में एक ही परिवार में चाचा-भतीजे और दामाद की मौत ने सबको बेदम कर दिया है। वहीं, चाईपुरवा के दो चचेरे भाई हादसे का शिकार हुए हैं। इनमें एक की जान चली गई जबकि दूसरा मौत से जूझ रहा है।
इकौना थाना क्षेत्र के सेमगढ़ा निवासी अंगनू (40) पुत्र पूर्णवासी और उनका भतीजा विजय कुमार (25) पुत्र किशोरीलाल और विजय का बहनोई प्रमोद कुमार (27) पुत्र पारसनाथ नए साल पर नेपाल में प्रभुनाथ धाम के दर्शन के लिए मंगलवार को घर से निकले थे।
उनके साथ उन्हीं की बिरादरी के गांव के ही चंद्रिका प्रसाद (40) पुत्र सुकई, ननकू प्रसाद (40) पुत्र चिंताराम, जगरावलगढ़ी के मजरा चाईपुरवा निवासी संतोष (20) पुत्र रामशंकर और उसका चचेरा भाई राजेश (22) पुत्र विनोद, आशीष उर्फ गोरख (16) पुत्र सुंदरलाल, प्रदीप (20) पुत्र प्रेमनाथ, पप्पू (24) पुत्र पंचराम, सौरूपुर निवासी ननकू यादव (22) पुत्र राजाराम, संतोष (28) पुत्र दुर्गविजय सिंह भी धाम के लिए बस से निकले थे।
भगवान भोले के दर्शन कर शुक्रवार रात बस से लौटकर सभी तुलसीपुर तक आ गए थे। तुलसीपुर से गांव तक जाने के लिए यहां सभी ने जान पहचान के सुरेंद्र कुमार (28) पुत्र रामचंदर निवासी जयचंद्रपुर कटघरा को गाड़ी लेकर आने को कहा था।
मालूम हो कि सुरेंद्र मैक्स (यूपी 43 टी 2139) चलाता था। सुरेंद्र शनिवार तड़के तुलसीपुर गया था। वहां से श्रद्धालुओं को लेकर जब गाड़ी तुलसीपुर व बलरामपुर के बीच कोतवाली देहात के बेलहा मोड़ पहुंची तभी कोहरे के कारण सामने से आ रही टूरिस्ट बस से भिड़ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दस लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य दो ने जिला अस्पताल बलरामपुर में दम तोड़ दिया।
वहीं, राजेश पुत्र विनोद अब भी कोमा में है। नौ बजे जब घर वालों को हादसे की खबर मिली तो कोहराम मच गया। जो जैसे था उसी हाल में बलरामपुर की ओर भागा।
बूढ़े कंधों का सहारा छिना तो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
चारों गांवों में हाहाकार मचा है। जिसके परिवारीजन चल बसे वो तो बेहाल हैं ही, गांव के अन्य लोग भी हादसे से सदमे में हैं। सेमगढ़ा निवासी विजय सफाई कर्मी था। वह अपने चाचा अंगनू व बहनोई प्रमोद कुमार के साथ प्रभुनाथ धाम से लौट रहा था। एक ही घर में तीन मौत से लोगों को सदमा लग गया है।
विजय की मां-पिता ने बेटे और दामाद दोनों को खो दिया है। मां बदहवास है, वहीं पिता का भी बुरा हाल है। सेमगढ़ा के ही ननकू प्रसाद के पांच बेटे व तीन बेटियां हैं, जो अभी बालिग भी नहीं हैं।
शनिवार को आठों के सिर से पिता का साया उठ गया। जैसे ही ननकू की मौत की खबर घर पहुंची परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पत्नी बार-बार ननकू को याद कर बेहोश हो जाती है। वहीं, बच्चे भी खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। वहीं चाईपुरवा में भी हाहाकार मचा है। राजेश व संतोष चचेरे भाई थे।
संतोष की मौत होे गई जबकि राजेश जिंदगी-मौत के बीच झूल रहा है। हादसे ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया है। वहीं, सौरुपुर निवासी ननकू यादव का महीने बाद उसका गौना आना था लेकिन उसकी दुनिया बसने से पहले ही उजड़ गई।