आंधी में टूटकर गिरी पेड़ की डाल को लेकर हुए विवाद में की गई फायरिंग से एक व्यक्ति की वर्ष 2001 में हत्या हो गई थी। इस मामले की सोमवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ने आरोपी ग्रामीण को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
वर्ष 2001 में गिलौला थाना क्षेत्र बहराइच का हिस्सा था। गिलौला थाना अंतर्गत ग्राम वैनी निवासी अदालत प्रसाद व राजाराम के बीच एक बाग के बंटवारे को लेकर रंजिश चल रही थी। 30 जुलाई 2001 को आई तेज आंधी में विवादित बाग के पेड़ की डाल टूटकर गिर गई।
इस डाल को विपक्षी राजाराम अपने सहयोगियों के साथ उठाकर ले जाने लगे। मौके पर पहुंचे अदालत प्रसाद ने विरोध किया तो कहासुनी के दौरान संघर्ष की स्थिति बन गई। इसी दौरान विपक्षियों ने हमला कर फायरिंग की। फायरिंग में राजकुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने अस्पताल जाते समय दम तोड़ दिया।
इस मामले में पुलिस ने विपक्षी राजाराम और रामरंग समेत 11 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। लेकिन विवेचना के दौरान आरोपी रामरंग का मामला सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दिया गया था।
जिसका आरोप पत्र पुलिस न्यायालय को नहीं भेज सकी थी। लेकिन सीबीसीआईडी की जांच में भी रामरंग दोषी मिले। तब उनका आरोप पत्र न्यायालय को भेजा गया। उसी मामले की सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रियाज ने सुनवाई की।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मनोज कुमार सिंह व बचाव पक्ष के वकील ने बहस की। बहस सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी रामरंग शुक्ल पुत्र रामतेज को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा से दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।